बदल गया इतिहास,24 साल बाद गैर गांधी के हाथ में कांग्रेस की कमान

जी हाँ गांधी परिवार ने जब ये फ़ैसला किया  कि वो पार्टी अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल नहीं होंगे तो इस पद के लिए अंत में दो नेता दावेदार बनकर सामने आए मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर.देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस (INC) के नए कप्तान का जब चुनाव हुआ तो निर्धारित हो चुका था कि  अगर कोई आश्चर्यजनक घटनाक्रम नहीं होता है तो अबकि बार मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के आलाकमान होंगे और हुआ भी वही खड़गे कांग्रेस के अगले खेवनहार बन गए .

एके एंटनी, अशोक गहलोत, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, आनंद शर्मा, अभिषेक मनु सिंघवी, अजय माकन, भूपिंदर हुड्डा, दिग्विजय सिंह, तारिक अनवर, सलमान खुर्शीद, अखिलेश प्रसाद सिंह, दीपेंदर हुड्डा, नारायण सामी, वी वथिलिंगम, प्रमोद तिवारी, पीएल पुनिया, अविनाश पांडे, राजीव शुक्ला, नासिर हुसैन, मनीष तिवारी, रघुवीर सिंह मीणा, धीरज प्रसाद साहू, ताराचंद, पृथ्वीराज चाव्हाण, कमलेश्वर पटेल, मूलचंद मीणा, डॉ. गुंजन, संजय कपूर और विनीत पुनिया जैसे दिग्गजों ने खड़गे को खुला सर्मथन देकर उनकी जीत पहले ही सुनिश्चित कर दी थी .G-23 के बड़े चेहरे आनंद शर्मा और मनीष तिवारी के खड़गे का सर्मथन करने से भी कांग्रेस (INC) के नए कप्तान की तस्वीर साफ हो गई थी .

तो वहीं कार्ति चिदंबरम, सलमान सोज, प्रवीण डाबर, संदीप दीक्षित, प्रद्युत बरदलोई, मोहम्मद जावेद, सैफुद्दीन सोज, जीके झिमोमी, और लोवितो झिमोमी ने शशि थरूर को सर्मथन दिया था .

बुधवार को आए नतीजों में उन्होंने 6825 वोट से शशि थरूर को हराया। खड़गे को 7897 वोट मिले, वहीं थरूर को 1072 वोट ही मिल सके। 416 वोट रिजेक्ट कर दिए गए। नतीजों के साथ ही कांग्रेस पार्टी को 24 साल बाद गैर-गांधी अध्यक्ष मिल गया है। नए अध्यक्ष खड़गे 26 अक्टूबर को अध्यक्ष पद की शपथ लेंगे .

खड़गे फिलहाल राज्यसभा में पार्टी के नेता हैं। कांग्रेस के ‘वन मैन वन पोस्ट’ नियम के तहत आने वाले दिनों में उन्हें इस्तीफा देना होगा। राहुल गांधी ने भी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान पार्टी के इस नियम को सख्ती से लागू करने की बात कही थी .

24 साल पहले चुनी गईं सोनिया गांधी के बाद खड़गे सबसे बड़े अंतर से पार्टी अध्यक्ष का चुनाव जीते हैं। कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए आखिरी बार 1998 में वोटिंग हुई थी। तब सोनिया गांधी के सामने जितेंद्र प्रसाद थे। सोनिया गांधी को करीब 7,448 वोट मिले, जबकि जितेंद्र प्रसाद 94 वोटों पर ही सिमट गए थे .

मल्लिकार्जुन खड़गे 51 साल बाद कांग्रेस पार्टी के दूसरे दलित अध्यक्ष बने हैं. इससे पहले बाबू जगजीवन राम 1970 से 1971 तक कांग्रेस के अध्यक्ष थे . 1970 में बाबू जगजीवन राम आजादी के बाद कांग्रेस के पहले दलित अध्यक्ष बने थे .

मां को जलता देखने वाले से कांग्रेस के आलाकमान तक मल्लिकार्जुन खड़गे  का सफ़र

1947 का अगस्त महीना। मैसूर राज्य (अब कर्नाटक) का वरवट्टी गांव। तब यहां निजाम की हुकूमत थी। भारत को बांटकर पाकिस्तान बनाया गया, तो इस इलाके में भी हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़क गए। वरवट्टी गांव पर निजाम की सेना ने हमला कर दिया। साथ में लुटारी (अमीरों को लूटने वाले) भी थे। उन्होंने पूरे गांव में आग लगा दी। यहीं एक घर में 5 साल के बच्चे ने अपनी मां को जिंदा जलते देखा।

पिता उसे बचाकर गांव से दूर ले गए। 3 महीने जंगल में रहे। मजदूरी की। बच्चे को काम में लगाने की बजाय पढ़ाया। मल्लिकार्जुन नाम का वह बच्चा बड़ा होकर पहले वकील बना, फिर यूनियन लीडर, विधायक, अपने प्रदेश कर्नाटक में मंत्री, सांसद, केंद्रीय सरकार में मंत्री और अब कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष । जी हां, ये मल्लिकार्जुन खड़गे की कहानी है . 

पूर्व केंद्रीय मंत्री और गांधी परिवार के भरोसेमंद खड़गे का नाम पहले भी चर्चा में था। खड़गे गांधी परिवार के करीबी हैं।  मल्लिकार्जुन खड़गे गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाते हैं, जिसको लेकर समय-समय पर उन्हें पार्टी की ओर से वफादारी का इनाम भी मिलता रहा है। साल 2014 में खड़गे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद भी कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेज दिया। पिछले साल गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया।

छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले 80 वर्षीय खड़गे ने एक लंबी पारी यूनियन पॉलिटक्स की भी खेली। वह संयुक्त मजदूर संघ के एक प्रभावशाली नेता थे, जिन्होंने मजदूरों के अधिकारों के लिए किए गए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। खड़गे का जन्म कर्नाटक के बीदर जिले के वारावत्ती इलाके में एक किसान परिवार में हुआ था। गुलबर्गा के नूतन विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की और गुलबर्गा के सरकारी कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। फिर गुलबर्गा के ही सेठ शंकरलाल लाहोटी लॉ कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वकालत करने लगे। कांग्रेस का हाथ खड़गे ने साल 1969 में था और पहली बार 1972 में कर्नाटक की गुरमीतकल असेंबली सीट से विधायक बने। खड़गे गुरमीतकल सीट से नौ बार विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों में मंत्री का पद भी संभाला ।

 

एक ही सीट से 9 बार विधायक, खड़गे का मराठी कनेक्शन

वर्ष 2000 में कन्नड़ सुपरस्टार डॉ. राजकुमार का जब चंदन तस्कर वीरप्पन ने अपहरण किया था, उस समय खड़गे प्रदेश के गृह मंत्री थे। 2009 से उन्होंने अपना संसदीय सफर शुरू किया जिसके बाद लगातार दो बार गुलबर्गा से लोकसभा सांसद रहे। इसके केंद्र में मनमोहन सिंह सरकार में श्रम व रोजगार मंत्री और रेल मंत्री की भूमिका निभाई। खड़गे खुद को भले ही कर्नाटक का मानते हों, लेकिन उनकी जड़ें मूल रूप से महाराष्ट्र में हैं।यही कारण है कि खड़गे बखूबी मराठी बोल और समझ लेते हैं। उनकी खेलों खासकर किक्रेट, हॉकी व फुटबॉल में खासी रुचि है। उनके बेटे प्रियांक खड़गे भी राजनीति में हैं, जो फिलहाल दूसरे टर्म के कांग्रेस विधायक हैं। कांग्रेस के सीनियर नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी वह नेता थे जिन्हें नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया था। वह नेशनल हेराल्ड से जुड़ी कंपनी यंग इंडिया के प्रिंसिपल ऑफिसर भी हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे के जीवन के कुछ यादगार लम्हे 

खड़गे का दोमंजिला ये घर गुलबर्गा के बसवानगर में है, यहां अभी किराएदार रहते हैं,खड़गे का परिवार बेंगलुरु में रहता है

गुलबर्गा की MSK मिल में खड़गे के पिता काम करते थे , इसी मिल में मल्लिकार्जुन खड़गे यूनियन लीडर और लीगल एडवाइजर भी रहे,यह अब बंद हो चुकी है

कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद खड़गे ने कानून की डिग्री ली, वे गरीबों से केस लड़ने के पैसे नहीं लेते थे , इसलिए कम वक्त में उनका प्रभाव बनने लगा 

शहर में नाम जमने के साथ ही खड़गे सामाजिक जीवन में आ गए,इसकी शुरुआत उन्होंने यूनियन लीडर बनने से की,यहीं से उनका राजनीति में जाने का रास्ता खुल गया

इधर, खड़गे की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है। PM मोदी ने ट्वीट कर लिखा- मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी के लिए मेरी शुभकामनाएं। उनका आगे का कार्यकाल फलदायी हो

तस्वीर 31 मार्च, 2022 की है, जब राज्यसभा से 72 सांसद रिटायर हुए थे. PM मोदी तब मल्लिकार्जुन खड़गे से गर्मजोशी से मिले थे, वे कई बार खड़गे की तारीफ कर चुके हैं

गुलबर्गा में बनवाया बुद्ध विहार

सियासी विश्लेषकों के अनुसार  पार्टी  के अगले अध्यक्ष के सामने अनेक चुनौतियाँ होंगी,अगले एक साल में दर्जनभर से ज्यादा राज्यों में विधानसभा चुनाव, पार्टी को एकजुट रखने की चुनौती

इस चुनाव में जीत के साथ ही खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले 65वें नेता हो गए हैं। वे बाबू जगजीवनराम के बाद कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले दूसरे दलित नेता हैं। खड़गे की जीत जितनी बड़ी है, उतनी ही बड़ी चुनौतियां भी उनके सामने हैं। वे जिस समय पार्टी आलाकमान की जिम्मेदारी लेने आगे आए हैं, तब केवल दो राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही कांग्रेस की सरकार बची है। वहीं, झारखंड और तमिलनाडु में पार्टी गठबंधन सरकार में शामिल है, लेकिन मुख्यमंत्री दूसरे दलों के हैं।

सोनिया लोकसभा चुनाव से एक साल पहले पार्टी अध्यक्ष बनी थीं, लेकिन 1999 के चुनाव में पार्टी जीत हासिल नहीं कर पाई थी। खड़गे जब अध्यक्ष बने हैं. तो इसी साल हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधानसभा चुनाव हैं। वहीं, अगले साल यानी 2023 में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत 10 राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में खड़गे के सामने पार्टी को एकजुट करने और चुनाव मैदान में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती होगी।

137 साल की कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए केवल 6 बार ही चुनाव हुए 

बात अगर .देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस (INC) के  कप्तानों की करें तो कुल 6 बार चुनाव हुए हैं। बाकी समय पार्टी अध्यक्ष सर्वसम्मति से ही पद पर काबिज हुए। जिन 6 बार चुनाव हुए, उनमें 5 बार जीतने वाले नेता गांधी परिवार से बाहर के रहे हैं 

हमेशा ही विवादों में रहा है देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव 

बात 1946 की है। देश आजाद होने वाला था और ये तय था कि कांग्रेस का अध्यक्ष ही देश का पहला प्रधानमंत्री बनेगा। कांग्रेस की 15 में से 12 प्रदेश समितियां सरदार पटेल को अध्यक्ष चुनने के पक्ष में थीं, लेकिन गांधी के कहने पर पटेल रेस से हट गए और अध्यक्ष बने जवाहरलाल नेहरू। ये किस्सा कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव से जुड़े सबसे विवादित और चर्चित किस्सों में से है। देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष पद का चुनाव हमेशा से ही राजनीति और विवादों का मंच बनता रहा है

कांग्रेस के नए कप्तान  मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि ये संगठन का चुनाव है, हमारे घर का मामला है लोगों ने मेरा समर्थन किया और  कांग्रेस जैसा विशाल संगठन चलाने के लिए गांधी परिवार का मार्गदर्शन चाहिए। अगर कोई कहता है कि उन्हें छोड़कर पार्टी को चलाया जा सकता है तो यह असंभव है,अब देखने वाली बात ये भी होगी कि कांग्रेस का आगे का सफ़र खड़गे शो होगा या रिमोट के माध्यम से गांधी परिवार ही पार्टी को चलाएगा