बाबा बागेश्वर की बड़ी मांग, बोले- हर स्कूल में पढ़ाई जाए रामचरितमानस तभी भारत बनेगा विश्वगुरु

Knews Desk- मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रामचरितमानस को लेकर बड़ी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अगर भारत को विश्वगुरु बनाना है, तो इसकी शुरुआत स्कूलों से करनी होगी। देश के हर स्कूल में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का अध्ययन अनिवार्य किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम के चरित्र और उनके आदर्शों पर चर्चा करते हुए कहा कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला भी सिखाता है। इसमें वर्णित आदर्श व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करने, दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने और नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं। उनके अनुसार, यदि बच्चों को बचपन से ही इन शिक्षाओं से परिचित कराया जाए, तो उनके व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में मदद मिल सकती है।बाबा बागेश्वर ने कहा कि वह भारत सरकार से आग्रह करेंगे कि देश के सभी स्कूलों में रामचरितमानस पढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस दिन भारत का हर व्यक्ति रामचरितमानस की शिक्षाओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों के अनुसार जीवन जीना शुरू कर देगा, उस दिन देश को विश्वगुरु बनाने के लिए केवल नारे लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उनके मुताबिक, इन आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाना ही भारत को इस दिशा में आगे ले जाने का रास्ता है।

अपने संबोधन में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने संविधान और रामचरितमानस की शिक्षाओं का उल्लेख भी किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार जीवन जीना और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि मनुष्य के भीतर मानवता की भावना विकसित करने में कौन-सा ग्रंथ योगदान दे सकता है। बाबा बागेश्वर के अनुसार, रामचरितमानस ऐसा ग्रंथ है, जो व्यक्ति को बेहतर इंसान बनने और श्रेष्ठ मानवीय आदर्शों के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने इसकी शिक्षाओं को बच्चों के जीवन में संस्कार, करुणा और सदाचार विकसित करने से जोड़ा।पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने बयानों और धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। करेरा में श्रीराम कथा के पहले दिन दिया गया उनका यह बयान भी चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने स्कूली पाठ्यक्रम में रामचरितमानस को शामिल करने की मांग भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से रखी। उनकी इस मांग से शिक्षा व्यवस्था में धार्मिक साहित्य और सांस्कृतिक परंपराओं की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *