भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी रेलवे स्टेशन की छत…. जैसलमेर के सोनू स्टेशन पर बड़ा हादसा, सगाई से पहले घायल हुए स्टेशन मास्टर, पांच साल पहले हुआ था रेलवे स्टेशन का निर्माण

डिजिटल डेस्क- राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण ‘सोनू लाइमस्टोन रेलवे स्टेशन’ पर रविवार को एक बड़ा हादसा होने से बाल-बाल बच गया। स्टेशन मास्टर कार्यालय की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर मनीष कुमार लहूलुहान हो गए। इस घटना ने रेलवे के निर्माण कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पोल खोल दी है। जानकारी के अनुसार, रविवार को स्टेशन मास्टर मनीष कुमार अपने कार्यालय में आधिकारिक कार्यों में व्यस्त थे। इसी दौरान बिना किसी आहट के छत का एक बड़ा हिस्सा मलबे के रूप में उनके ऊपर गिर गया। गनीमत यह रही कि मलबे का मुख्य वजन उनके सिर पर सीधे नहीं गिरा, अन्यथा कोई बड़ी जनहानि हो सकती थी। हादसे में मनीष के पैर में गंभीर चोटें आई हैं। कार्यालय में अचानक हुए इस धमाके और चीख-पुकार को सुनकर वहां मौजूद अन्य रेलकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और मनीष को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।

खुशियों के बीच पसरा सन्नाटा

यह हादसा उस वक्त हुआ जब मनीष के परिवार में खुशियों का माहौल था। आगामी 18 मई को मनीष की सगाई होने वाली है। परिवार के सदस्य उत्सव की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन अचानक आए इस हादसे की खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया है। हालांकि, डॉक्टरों ने बताया है कि मनीष की स्थिति अब खतरे से बाहर है, लेकिन इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा डर पैदा कर दिया है।

100 करोड़ का राजस्व, फिर भी जान जोखिम में

सोनू लाइमस्टोन स्टेशन भारतीय रेलवे के लिए ‘सोने का अंडा देने वाली मुर्गी’ के समान है। यहाँ की खदानों से उच्च गुणवत्ता वाले स्टील ग्रेड लाइमस्टोन की लोडिंग होती है, जिससे रेलवे को हर महीने 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व मिलता है। विडंबना देखिए कि जो स्टेशन रेलवे का खजाना भर रहा है, वहां के कर्मचारियों की जान की कोई कीमत नहीं समझी जा रही है। मात्र 5 साल पहले बनी नई इमारत की छत का गिरना यह साफ दर्शाता है कि निर्माण के दौरान किस कदर बंदरबांट और लापरवाही बरती गई है।

अधिकारियों में हड़कंप, जांच के आदेश

इमारत के ढहने की खबर फैलते ही रेलवे प्रशासन के उच्च अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। सवाल उठ रहे हैं कि जो बिल्डिंग दशकों तक चलने के लिए बनाई गई थी, वह 5 साल भी नहीं टिक पाई? स्थानीय लोगों और रेल संगठनों ने उन ठेकेदारों और इंजीनियरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है जिन्होंने इस निर्माण की गुणवत्ता को हरी झंडी दी थी।

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