उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं, लेकिन सियासी पारा अभी से बढ़ने लग गया है.सभी राजनीतिक दल अभी से अपनी तैयारियों में लग गये है, मुख्य रूप से देश और प्रदेश के दोनो बड़े राजनीतिक दल भाजपा व कांग्रेस के बीच काफी टक्कर देखने को मिल रही है. भाजपा अपनी उपलब्धियों के दम पर मिशन 2027 फतेह करने का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस अपने कार्यकाल में किये गये काम और वर्तमान सत्ताधारी सरकार की कमियों को मुद्दा बनाकर सत्ता में वापसी का सपना देख रही है. लेकिन भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर के बीच अब तीसरे मोर्चे की आहट ने दोनों दलों की चिंता बढ़ा दी है. और जिससे कही न कही खेल भी बदलने की चर्चाये तेज़ होने लगी है.आपको बता दे, स्थानीय मुद्दों की अनदेखी से नाराज प्रदेश के लगभग 30 क्षेत्रीय दलों ने एक साथ मिलकर भाजपा और कांग्रेस को ललकारने का मन बना लिया है.जिसमें उत्तराखंड क्रांति दल, स्वाभिमान मोर्चा, राष्ट्रीय रीजनल पार्टी समेत कई जनपक्षधर संगठन अब भाजपा व कांग्रेस को चुनौती देने का काम करने जा रहे है. इनका आरोप है कि राष्ट्रीय दलों ने पलायन, बेरोजगारी, भू-कानून जैसे पहाड़ के असल मुद्दों को नजरअंदाज किया है. जिसके चलते सभी स्थानीय दल मिलकर मजबूत तीसरा राजनीतिक विकल्प तैयार कर रहे हैं.और सीट बंटवारे और साझा रणनीति पर मंथन भी शुरू हो चुका है.मकसद साफ है, 2027 में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को हराना. इस नए समीकरण से राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है,और भाजपा और कांग्रेस अपने अपने दावे पेश करती दिखाई पड़ रही है.
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सभी दल अपने अपने तरीके से तैयारियां कर रहे है। लेकिन प्रदेश में इस बार कांग्रेस व बीजेपी को दरकिनार करते हुए क्षेत्रीय दलों ने कमर कस ली है। जिस तरह से उत्तराखंड के ऐसे 30 क्षेत्रीय दल एक मंच पर आए है। जिसमे यूकेडी, राष्ट्रीय रीजनल पार्टी आदि प्रमुख है।जब से उत्तराखंड बना है. तब से कांग्रेस या बीजेपी ही सरकार बनाती आ रही है। लेकिन इस बार जिस तरह से क्षेत्रीय दल एक साथ मंच आये है। उससे तो ऐसा ही लगता है। कि दोनों राष्ट्रीय दलों को कहीं ना कहीं बड़ी टक्कर देने की तैयारियों में जुट गये है। इन क्षेत्रीय दलों का ये भी कहना है, कि अब तक बीजेपी व कांग्रेस ने इस प्रदेश को छला है।वही भाजपा और कांग्रेस में अंदरूनी हलचल चुनाव आने से पहले बड़ा दिया है.
कुल मिलाकर उत्तराखंड राज्य को बने 26 साल पूरे हो चुके हैं. जो की 27 साल की और प्रवेश करने जा रहा है, लेकिन अभी तक इस प्रदेश में दोनों ही नेशनल पार्टी कांग्रेस और भाजपा की ही सत्ता देखने को मिली है. हालांकि भाजपा का कार्यकाल प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है.वहीं कहीं ना कहीं इन छोटे क्षेत्रीय दलों को आगे बढ़ाने का मौका अभी तक नहीं मिल पाया और यही वजह है, कि तमाम क्षेत्रीय दल 2027 के चुनाव से पहले एक ही मंच पर जल्द ही चुनावी घोषणाओं के साथ नजर आ सकते हैं. जो आने वाले समय में भाजपा और कांग्रेस की मुसीबत बढ़ा भी सकते हैं.