उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड भाजपा में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। जहाँ एक ओर भाजपा अपनी मजबूती जमीनी स्तर तक बनाने में जुटी है वही उससे पहले पार्टी के अंदर की उलझने कम होने का नाम नहीं ले रही है। मामला, प्रदेश के चौबट्टाखाल से विधायक और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और वही के भाजपा कार्यकर्ताओं का, जहाँ विधायक के खिलाफ अब पार्टी के ही कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। मामला इतना बढ़ा कि कार्यकर्ताओं ने पहले मुख्यमंत्री और फिर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सामने अपनी शिकायत रखीं। इसके बाद संगठन के दबाव के बीच मंत्री सतपाल महाराज भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे और नाराज कार्यकर्ताओं के साथ लंबी बैठक की।हलाकि बैठक में सब ऑल इज वेल की बात की जा रही है. मगर सब कुछ सही दिखाई नहीं दे रहा वही एक बार विपक्ष को भी भाजपा सरकार को घेरने का अच्छा मौका जरूर मिल गया है.भाजपा अपनी जीत और चुनाव में पूरी तैयारी का दावा तो कर रही है.लेकिन भीतर घात और नाराजगी के सुर भी छुपाए से नहीं छुप रहे है. यही हाल कांग्रेस में भी दिखाई दे रहा है.कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया हल्द्वानी दौरे के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खेमे की कथित नाराजगी, वरिष्ठ नेताओं की जनसभा से गैरमौजूदगी और दिग्गज कांग्रेस नेता गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल के यूकेडी में शामिल होने जैसे घटनाक्रमों ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
बीजेपी दफ्तर में पहुंचकर चौबट्टाखाल विधानसभा के लोगों ने विकास कार्यों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है.अपनी विधानसभा से विधायक और सरकार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के सामने उन्होंने भ्रष्टाचार से लेकर दूसरे तमाम विकास कार्यों में हो रही हीलाहवाली को लेकर अपनी बात रखी. कार्यकर्ताओं ने भ्रष्टाचार समेत कई मामलों को लेकर अपनी शिकायत मंत्री के सामने रखीं और समस्याओं के समाधान की मांग की.आमतौर पर भाजपा कार्यालय पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठकों और सरकार की उपलब्धियों के बखान से गुलजार रहता है, लेकिन रविवार को यहां पार्टी से जुड़े कुछ कार्यकर्ता और बीरोंखाल क्षेत्र के स्थानीय निवासी अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे. खास बात यह रही कि इसी दौरान चौबट्टाखाल विधायक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी भाजपा कार्यालय पहुंचे हुए थे.बैठक में कार्यकर्ताओं की नाराजगी, क्षेत्रीय समस्याओं और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मंत्री की ओर से संवादहीनता और कुछ गलतफहमियों को विवाद की वजह बताया गया। बैठक के बाद यह संदेश देने की कोशिश हुई कि मामला बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया है। वहीं कांग्रेस समेत विपक्षी दलों को भी भाजपा के अंदरूनी असंतोष को मुद्दा बनाने का मौका मिला है।
भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं के इस तरह अपनी नाराजगी जाहिर करने के बाद कुछ समय के लिए असमंजस की स्थिति भी बनी. हालांकि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कार्यकर्ताओं से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना. महाराज ने मामले को आपसी समन्वय की कमी से जुड़ा बताया.लेकिन सवाल यह है,2027 की सियासी जंग से पहले भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि अपने ही संगठन के भीतर उठ रही नाराजगी को साधने की है। सतपाल महाराज सहित दर्जनों विधायकों के अपने क्षेत्र में हुए अब तक के काम और आने वाले चुनाव में परफॉर्मेंस के आधार पर टिकटों के बंटवारे तक ये नाराजगी आने वाले चुनाव में कितना राजनीतिक असर डालती हैं,यह देखने वाली बात होगी।