अपने ही बिगड़ते खेल !

उत्तराखण्ड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। सभी राजनीतिक दल जनता के बीच है, कोई दावों के साथ तो कोई वादों और न्याय की बात के साथ।लेकिन इन्ही सबके बीच न्याय और व्यक्तिगत संपत्ति से जुड़ा एक मामला अब प्रदेश की राजनीति में सियासी बहस का विषय बन गया है। दरअसल, राजधानी देहरादून में एक दिव्यांग व्यक्ति हरिओम ने कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद पर उनकी संपत्ति हड़पने और मकान के भुगतान में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सोनिया आनंद जिनका नाम पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत से भी जोड़ा जाता रहा है। पीड़ित हरिओम का आरोप है कि मकान के भुगतान के लिए दिया गया चेक बाउंस हो गया, जिसके बाद उन्हें अपने ही हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मामले में शिकायत मिलने के बाद एसएसपी ने भी जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद ने हरिओम के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि इस मामले में कानूनी कार्यवाही पिछले कई वर्षों से उच्च न्यायलय में चल रही है। ऐसे में अब अचानक इस मुद्दे को उठाना भाजपा की राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा इस मामले को राजनीतिक रंग देकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है। इधर, इस पूरे प्रकरण में पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ती रावत का बयान भी सामने आया है, जिसने मामले को और उलझा दिया है। वीडियो जारी कर दीप्ती रावत ने जमीन हड़पने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह हरक सिंह रावत की पत्नी हैं और उन्होंने किसी की जमीन नहीं हड़पी है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई दूसरी महिला खुद को हरक सिंह रावत की पत्नी बता रही है, तो उसके पास इसका क्या प्रमाण है। दीप्ती रावत ने भ्रामक खबरों से परिवार को मानसिक पीड़ा होने की बात कहते हुए न्यायालय जाने की चेतावनी भी दी है। उधर भाजपा ने इस विषय को गंभीर और जांच योग्य बताते हुए तंज भी कसा हैं। जिसके चलते आरोप प्रत्यारोप भी तेज़ नज़र आने लगा हैं।

राजधानी देहरादून में सामने आये कांग्रेस नेत्री सोनिया आंनद से जुड़े संपत्ति विवाद ने अब उत्तराखंड की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। मामला एक दिव्यांग व्यक्ति के न्याय की मांग से जुड़ा है, लेकिन इसमें कांग्रेस नेत्री सोनिया आनंद और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पीड़ित हरिओम जहां अपने मकान के भुगतान और चेक बाउंस होने को लेकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं सोनिया आनंद इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे भाजपा की साजिश बता रही हैं। हालांकि पुलिस प्रशासन जांच में जुट गया है। दूसरी तरफ हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ती रावत के बयान ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने जमीन हड़पने के आरोपों को नकारते हुए भ्रामक खबरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है। वही भाजपा ने विषय को गंभीर बताया है और सोनिया आनंद के भाजपा पर साजिश रचने के आरोपों पर पलटवार भी किया हैं। जिसके चलते आपसी बयानबजी के बीच राजनीति जमकर हो रही है।

उत्तराखण्ड की राजनीति में बहस का मुद्दा बना यह व्यक्तिगत मामला कई सवालों को जन्म दे रहा है। एक तरफ एक दिव्यांग व्यक्ति अपने अधिकार और संपत्ति के भुगतान के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है, तो दूसरी तरफ आरोपों के घेरे में आई कांग्रेस नेत्री इसे राजनीतिक षड्यंत्र बता रही हैं। वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ती रावत की ओर से सामने आया बयान इस विवाद को एक अलग दिशा दे रहा है। ऐसे में इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यही है कि हरिओम को आखिर कब न्याय मिलेगा और संपत्ति से जुड़े आरोपों की वास्तविकता क्या निकल पाती है। हालांकि पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच के आदेश दिए हैं, लिहाजा जांच में सामने आने वाले तथ्य काफी महत्वपूर्ण होंगे। लेकिन जिस तरह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बनता जा रहा है, उससे आने वाले दिनों में सियासी टकराव और बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि जांच तथ्यों को सामने लाती है या यह विवाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है।

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