पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में चंडीगढ़ में पार्टी ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. गुलजार सिंह की मौत के मामले में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग की गई. प्रदर्शन में कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के नेता एक मंच पर नजर आए.
Knews desk- पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी गुटबाजी के बीच मंगलवार को चंडीगढ़ में पार्टी की एकजुट तस्वीर देखने को मिली. प्रदेश के नए प्रभारी सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई बड़े नेता एक साथ नजर आए.
कांग्रेस का यह प्रदर्शन संगरूर के दिड़बा निवासी गुलजार सिंह की मौत के मामले को लेकर था. पार्टी का आरोप है कि गुलजार सिंह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था. इसके बाद उन्हें कथित तौर पर अपमान और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी.
कांग्रेस ने इस मामले में हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से हटाने और समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच की मांग की है. हालांकि, चीमा ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है. मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी है.
गुलजार सिंह की मौत पर सियासत तेज
गुलजार सिंह की मौत को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है. कांग्रेस के मुताबिक, गुलजार सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से पंजाब में खुलेआम बिक रहे नशे को लेकर सवाल किया था. इस घटना का वीडियो भी सामने आया था. कांग्रेस और परिवार की ओर से आरोप लगाए गए कि सवाल पूछने के बाद गुलजार सिंह को अपमानित किया गया.
सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, मामले में कई लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. कांग्रेस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.
सचिन पायलट ने पंजाब का प्रभार संभालने के बाद पहली बार इतने बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व किया. कांग्रेस ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के चंडीगढ़ स्थित आवास की ओर मार्च करने का ऐलान किया था. पार्टी का आरोप है कि पंजाब में नशे की समस्या से निपटने में आम आदमी पार्टी सरकार नाकाम रही है.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब कोई आम नागरिक सरकार के मंत्री से नशे के खिलाफ सवाल करता है और उसके बाद उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है, तो मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी हो जाती है.
एक मंच पर दिखे कांग्रेस के अलग-अलग गुट
इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग खेमों के नेता एक साथ नजर आए. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया.
पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन को लेकर लंबे समय से खींचतान चलती रही है. ऐसे में सचिन पायलट के नेतृत्व में पार्टी के बड़े नेताओं का एक मंच पर आना 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर बढ़ने लगे. पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया.
इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की भी हुई. बाद में पुलिस ने सचिन पायलट समेत कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया.
2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं. ऐसे में कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ प्रभावी मुद्दे उठाने की चुनौती है. पार्टी के लिए जरूरी है कि अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद कम हों और सभी नेता एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरें.
गुलजार सिंह की मौत का मामला कांग्रेस को सरकार पर हमला करने के साथ-साथ संगठन में एकता दिखाने का अवसर भी दे रहा है. पंजाब की राजनीति में नशा लंबे समय से बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है. कांग्रेस अब इस मामले को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है.
सचिन पायलट के नेतृत्व में हुआ यह प्रदर्शन पंजाब कांग्रेस की एकजुटता की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है. हालांकि, यह एकजुटता आने वाले दिनों में कितनी कायम रहती है और क्या पार्टी इसे चुनावी ताकत में बदल पाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा.