किसी की आंखें नम, कोई नाराज… उमर सरकार के कैबिनेट विस्तार से NC में बेचैनी

जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर नाराजगी सामने आने लगी है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को चार नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, लेकिन मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ वरिष्ठ नेताओं और उनके समर्थकों में असंतोष दिखाई दिया। अनंतनाग पश्चिम से विधायक अब्दुल मजीद लारमी अपनी निराशा जाहिर करते हुए भावुक हो गए, वहीं ईदगाह के विधायक मुबारक गुल के समर्थकों ने भी सवाल उठाए। शपथ ग्रहण समारोह में 11 विधायकों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

Knews Desk – उमर अब्दुल्ला सरकार के गठन के करीब दो साल बाद हुए इस पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार में चार विधायकों को मंत्री बनाया गया। श्रीनगर के लोक भवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अली मोहम्मद सागर, शमीमा फिरदौस, मीर सैफुल्लाह और अल्ताफ अहमद वानी उर्फ अल्ताफ कालू को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। चारों नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हैं और कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इस फेरबदल के साथ मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल में सदस्यों की संख्या नौ हो गई। वहीं, जम्मू संभाग के चंब से निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया। उनके हटने के बाद जम्मू के मैदानी इलाकों का प्रतिनिधित्व मंत्रिमंडल में नहीं रहा। फिलहाल जम्मू संभाग से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और मंत्री जावेद अहमद राणा सरकार में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान 11 विधायकों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। इनमें बिजबेहारा से डॉ. बशीर अहमद वीरी, गुरेज से नजीर अहमद गुरजी, करनाह से जावेद अहमद मीरचल, कंगन से मियां मेहर अली, थन्नामंडी से मुजफ्फर इकबाल खान, बुधल से जावेद इकबाल चौधरी, गुलाबगढ़ से इंजीनियर खुर्शीद अहमद, पुंछ से एजाज अहमद जान, रामबन से अर्जुन सिंह राजू, इंदरवाल से प्यारेलाल शर्मा और बनी से डॉ. रमेश्वर सिंह के नाम शामिल हैं। इन विधायकों की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं, हालांकि उनकी गैरमौजूदगी का कारण अलग-अलग हो सकता है।

अनंतनाग पश्चिम से विधायक और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता अब्दुल मजीद लारमी को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की उम्मीद थी। लेकिन नए मंत्रियों की सूची में नाम नहीं आने से वह निराश हो गए। शपथ ग्रहण समारोह के बाद उन्होंने अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें मंत्री बनने की उम्मीद थी और इस फैसले से उनका दिल टूटा है। लारमी की नाराजगी को पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

इसी तरह ईदगाह से विधायक मुबारक गुल के समर्थकों ने भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। उनके समर्थकों ने पार्टी मुख्यालय और आवास के बाहर प्रदर्शन कर सवाल उठाया कि छह बार विधायक रह चुके वरिष्ठ नेता को मंत्री बनने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया। इस फैसले को संगठन में उनकी भूमिका बढ़ाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाओं के बीच श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का मामला भी सुर्खियों में है। वह पहले ही पार्टी नेतृत्व से वैचारिक मतभेदों के चलते 3 नवंबर को नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा से इस्तीफा देने की घोषणा कर चुके हैं। उनके मतभेद मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व के रुख से जुड़े रहे हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं के साथ बातचीत के जरिए स्थिति को संभाल पाते हैं या यह नाराजगी आने वाले दिनों में नई राजनीतिक चुनौती बनती है।

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