ईरान में बवाल: बासिज समूह ने विरोध प्रदर्शन दबाने के लिए सड़कों पर कदम रखा, 500 से ज्यादा मौतें

KNEWS DESK- ईरान में महंगाई और सरकार के खिलाफ जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार ने बासिज नामक अर्द्धसैनिक समूह को सड़कों पर उतार दिया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार, अब तक इस संगठन की कार्रवाई में लगभग 500 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है। बासिज को ईरान का सबसे खूंखार सैन्य समूह माना जाता है और इसे सरकार के खिलाफ विद्रोह रोकने के लिए बनाया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (9 जनवरी) को जुमे की नमाज के बाद खामेनेई ने देश के नाम एक संबोधन में विरोध प्रदर्शन को अमेरिका का एजेंडा बताया और कहा कि ईरान किसी के सामने नहीं झुकने वाला है। इसके बाद संसद की सिफारिश पर बासिज को सड़कों पर तैनात किया गया।

बासिज का मतलब फारसी में ‘लामबंदी’ है। इसे 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद बनाया गया था। उस समय के नेता अली खुमैनी का मानना था कि यह संगठन ईरान को अमेरिका और बाहरी ताकतों से सुरक्षित रखेगा। बासिज में ग्रामीण, इस्लामिक रूढ़िवादी पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल होते हैं और स्थानीय स्तर पर मस्जिद के जरिए लोगों को नियंत्रित किया जाता है।

इस संगठन को बड़े पैमाने पर ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड नियंत्रित करता है। इसमें करीब 2 करोड़ सैनिक हैं, जिनकी उम्र 18 से 50 साल के बीच है। बासिज ने पहले भी 2009 और 2022 में ईरान में विरोध प्रदर्शन दबाने में अहम भूमिका निभाई थी।

अमेरिका ने बासिज और उसके कुछ कमांडरों पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह संगठन असहमति और विरोध को हिंसक तरीके से कुचलने में सक्रिय है। मानवाधिकार आयोगों का कहना है कि बासिज द्वारा किए गए कार्रवाईयों में नागरिकों की हत्या और हिंसा शामिल है।

ईरान में विरोध प्रदर्शन 27 दिसंबर 2025 से शुरू हुए हैं, जिनका मुख्य कारण महंगाई और सरकार के खिलाफ असंतोष है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज हैं, लेकिन कुछ दंगाईयों ने प्रदर्शन को हाईजैक कर दिया।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस स्थिति पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान में अत्याचार जारी रहता है, तो अमेरिका सैनिक कार्रवाई पर विचार कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *