पहले माफी, फिर हमले, ईरान की खाड़ी देशों पर जारी कार्रवाई की क्या है वजह?

KNEWS DESK- ईरान ने युद्ध के आठवें दिन भी खाड़ी देशों पर अपने हमले जारी रखे हैं। सऊदी अरब, कुवैत और UAE में ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को इंटरसेप्ट किया गया। ये हमले ईरानी राष्ट्रपति Pajeshkian द्वारा पड़ोसी देशों से माफी मांगने के बावजूद हुए हैं। राष्ट्रपति पेजेशकियान ने पहले कहा था कि ईरान की मंशा पड़ोसी देशों पर हमला करने की नहीं है और यह केवल अमेरिका की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई कर रहा है।

ईरानी सरकारी टीवी पर दिए गए भाषण में पेजेशकियान ने कहा, “मुझे अपनी तरफ से और ईरान की तरफ से उन पड़ोसी देशों से माफ़ी मांगनी चाहिए जिन पर हमले किए गए थे। अंतरिम लीडरशिप काउंसिल ने सहमति दी है कि पड़ोसी देशों पर और हमले नहीं किए जाएंगे और कोई मिसाइल तब तक नहीं दागी जाएगी जब तक ईरान पर हमला नहीं होता।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान सरेंडर नहीं करेगा।

हालांकि, पेजेशकियान ने एक शर्त भी रखी थी। उन्होंने कहा कि अगर पड़ोसी देशों के एयरस्पेस या जमीन का इस्तेमाल कर ईरान पर हमला नहीं किया जाता है, तो वह इन देशों को निशाना नहीं बनाएगा। लेकिन शनिवार रात, तेहरान पर इजराइल द्वारा कई हमले किए गए, जिसमें ऑयल डिपो पर हमला सबसे भयानक बताया गया। इसके जवाब में Islamic Revolutionary Guard Corps ने इजराइल की हाइफा ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पेजेशकियान की माफी के बाद इसे अपनी सफलता का श्रेय देने की कोशिश की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “ईरान, जो बुरी तरह पिट रहा था, उसने मिडिल ईस्ट पड़ोसियों से माफी मांगी और सरेंडर कर दिया है। यह वादा अमेरिका और इजराइल के लगातार हमलों के दबाव में हुआ।” ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व देशों ने उनका धन्यवाद किया और अब ईरान क्षेत्र में दबंग नहीं है, बल्कि कमजोर स्थिति में है।

ईरान और इजराइल के बीच हालिया तनाव ने मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय देशों के बीच रणनीतिक संतुलन और तनाव दोनों बढ़ सकते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा शांतिपूर्ण समाधान की मांग जारी है।

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