गैस किल्लत के बीच बड़ी कार्रवाईः गाजियाबाद में गैस एजेंसी पर बड़ा एक्शन, 99 सिलिंडर मिले गायब, कालाबाजारी के आरोप में केस दर्ज

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र में एलपीजी गैस की कालाबाजारी को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। धीरेन्द्र गैस सर्विस के खिलाफ जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद एजेंसी संचालकों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पूरा मामला ग्राम फफराना निवासी सचिन चौधरी की शिकायत से शुरू हुआ। उन्होंने आरोप लगाया था कि मोदी मंदिर के सामने स्थित यह गैस एजेंसी घरेलू और कमर्शल सिलिंडरों की कालाबाजारी कर रही है और उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध नहीं कराई जा रही। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग, आपूर्ति विभाग और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की संयुक्त टीम ने एजेंसी पर छापेमारी कर निरीक्षण किया। जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों ने पाया कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस के 99 सिलिंडर रिकॉर्ड से गायब हैं। वहीं 19 किलो वाले कमर्शल सिलिंडरों का स्टॉक रजिस्टर भी अपडेट नहीं था, जिससे कालाबाजारी की आशंका और गहरा गई।

उपभोक्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

जांच के दौरान कई उपभोक्ताओं ने भी गंभीर आरोप लगाए। शिकायतकर्ताओं में सचिन चौधरी के अलावा आवेश और हिमांशु त्यागी समेत अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें गैस डिलीवरी के मैसेज तो मिले, लेकिन वास्तविक रूप से सिलिंडर की आपूर्ति नहीं की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर सिलिंडरों को ब्लैक मार्केट में बेचा जा रहा था। प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए गैस एजेंसी की प्रबंधक योगिता तोमर और प्रोपराइटर कुसुम तोमर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एलपीजी की कमी के चलते दिखने लगा प्रभाव

एलपीजी की कालाबाजारी का असर अब उद्योगों और आम जनता दोनों पर दिखने लगा है। साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी चरणजीत ने बताया कि कई छोटे और मध्यम उद्योग एलपीजी पर निर्भर हैं, और गैस की कमी से उनका काम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो उद्योगों को मंदी का सामना करना पड़ सकता है। स्थिति यह है कि छोटे सिलिंडरों की कीमत 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए भारी बोझ बन गया है। कई घरों में गैस की कमी के कारण खाना बनाने तक में दिक्कतें आ रही हैं।

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