Knews Desk– NEET UG 2026 पेपर लीक के बाद राष्ट्रीय परीक्षाओं की पारदर्शिता और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री की ओर से गठित नंदन नीलेकणि समिति ने भी काम शुरू कर दिया है। इसी बीच शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति NEET UG, परीक्षा सुधारों और कोचिंग सेंटरों के कामकाज की समीक्षा करेगी। समिति कोचिंग संस्थानों के लिए बनाए गए नियमों, उनके क्रियान्वयन और अनुपालन की स्थिति की भी जांच करेगी।राष्ट्रीय परीक्षाओं की शुचिता पर विचार करते हुए समिति सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर चर्चा करेगी। NEET UG 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर कई सवाल उठे हैं। ऐसे में परीक्षा संचालन से जुड़ी प्रक्रियाओं और संस्थागत व्यवस्थाओं की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार करना है।
इससे पहले भी परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संसदीय समिति ने अपनी सिफारिशें दी थीं। पिछली समिति के अनुसार, तमाम उपायों के बावजूद NEET UG 2026 की परीक्षा रद्द होना प्रक्रियात्मक और संस्थागत स्तर पर बड़े सुधारों की जरूरत को दर्शाता है। इसी पृष्ठभूमि में परीक्षा प्रणाली और कोचिंग सेंटरों के नियमन की समीक्षा की जाएगी।लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति का पुनर्गठन किया गया है। इसका कार्यकाल सितंबर 2027 तक निर्धारित किया गया है। समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लागू करने की दिशा में हुई प्रगति का आकलन करेगी। इसके साथ ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कामकाज और प्रदर्शन की समीक्षा भी की जाएगी।
समिति CBSE की संबद्धता, नियमन, परीक्षा संचालन और विदेशों में उसकी गतिविधियों पर भी विचार करेगी। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE) से जुड़े विषय भी समीक्षा के दायरे में होंगे। छात्रों के कल्याण और उनके लिए उपलब्ध सहायता प्रणालियों की जांच करना भी समिति के एजेंडे में शामिल है।इसके साथ ही शिक्षा और छात्रों की रोजगार क्षमता पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा उभरती तकनीकों के प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण से संबंधित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा भी समिति करेगी। इस तरह समिति का दायरा केवल NEET UG और कोचिंग सेंटरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, छात्र कल्याण और बदलती तकनीक के प्रभाव जैसे विषय भी इसमें शामिल होंगे। संसदीय समिति की यह समीक्षा परीक्षा व्यवस्था में सुधार, कोचिंग सेंटरों के नियमन और शिक्षा संस्थानों की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा का आधार बन सकती है।