Knews Desk- हर साल हजारों छात्र जेईई मेन में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, लेकिन 12वीं बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर पाते। ऐसे में उनका सपना आईआईटी, एनआईटी या कुछ अन्य केंद्रीय संस्थानों में दाखिला लेने का अधूरा रह जाता है। हालांकि ऐसे छात्रों के लिए राहत की खबर है कि देश के कई प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान 75 प्रतिशत बोर्ड अंक की अनिवार्यता के बिना भी प्रवेश का मौका दे रहे हैं।
दरअसल, एनआईटी, आईआईआईटी और जीएफटीआई जैसे कई संस्थानों में दाखिले के लिए 12वीं में 75 प्रतिशत अंक या संबंधित बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में होना जरूरी है। यह नियम 2026 में भी लागू है। लेकिन कई निजी और स्वायत्त इंजीनियरिंग संस्थान ऐसे हैं, जहां प्रवेश के लिए 75 प्रतिशत अंक जरूरी नहीं हैं। इनमें छात्रों को जेईई मेन स्कोर, संस्थान की प्रवेश परीक्षा या अन्य पात्रता मानदंडों के आधार पर दाखिला दिया जाता है।
ऐसे प्रमुख संस्थानों में IIIT हैदराबाद, IIIT बेंगलुरु, थापर इंस्टीट्यूट पटियाला, LNMIIT जयपुर, DAIICT गांधीनगर, VIT वेल्लोर, MIT मणिपाल, अमिटी यूनिवर्सिटी और कुछ अन्य निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन संस्थानों में आमतौर पर 50 से 70 प्रतिशत तक बोर्ड अंकों की पात्रता रखी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी छात्र का जेईई रैंक अच्छा है लेकिन वह 75 प्रतिशत बोर्ड मानदंड पूरा नहीं कर पाया है, तो उसे निराश होने की जरूरत नहीं है। ऐसे छात्र री-इवैल्यूएशन, इम्प्रूवमेंट परीक्षा और वैकल्पिक इंजीनियरिंग कॉलेजों के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक आज देश में कई ऐसे संस्थान हैं जो छात्रों की क्षमता का आकलन केवल बोर्ड प्रतिशत के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी तकनीकी योग्यता और प्रवेश परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर भी करते हैं। ऐसे में कम बोर्ड अंक आने के बावजूद इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के अवसर खुले हुए हैं।