Knews Desk– वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, जियो-पॉलिटिकल तनाव और बढ़ती लागत के बीच भारतीय कॉरपोरेट जगत का कामकाज तेजी से बदल रहा है. अब कंपनियां “कम खर्च, ज्यादा काम” की रणनीति पर फोकस कर रही हैं. गैर-जरूरी खर्चों में कटौती, यात्राओं पर नियंत्रण और टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल के जरिए कंपनियां मंदी जैसी चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रही हैं.
वर्क फ्रॉम होम ,वर्चुअल मीटिंग्स और डिजिटल सहयोग
भारतीय कंपनियां अब वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के सही इस्तेमाल को प्राथमिकता दे रही हैं. इसके तहत हाइब्रिड वर्क मॉडल, वर्क फ्रॉम होम (WFH), वर्चुअल मीटिंग्स और डिजिटल सहयोग को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है. कंपनियों का मानना है कि इससे न केवल लागत घटेगी, बल्कि कार्यकुशलता भी बढ़ेगी.
IndusInd Bank ने कई विभागों में रोस्टर-बेस्ड वर्क फ्रॉम होम नीति का विस्तार शुरू कर दिया है. बैंक के अधिकारियों के अनुसार, इससे संसाधनों की बचत के साथ कर्मचारियों की उत्पादकता में भी सुधार हो रहा है. वहीं Lupin ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के नियम और सख्त कर दिए हैं. कंपनी अब केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ही ट्रैवल की अनुमति दे रही है. इसी तरह PwC India ने कर्मचारियों से कहा है कि वे तभी यात्रा करें जब उसका स्पष्ट व्यावसायिक उद्देश्य हो. Hindustan Unilever भी बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है.
होम इंटीरियर डिजाइन कंपनी HomeLane ने भी अपने बिजनेस मॉडल में बदलाव किए हैं. कंपनी अब छोटी दूरी की फ्लाइट्स की बजाय ट्रेन यात्रा को बढ़ावा दे रही है ताकि ईंधन की खपत और यात्रा लागत दोनों कम हो सकें. साथ ही, कई निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को स्थानीय टीमों को सौंपा जा रहा है, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों की बार-बार यात्रा की जरूरत कम हो रही है.
आईटी और टेक सेक्टर ने इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाई
आईटी और टेक सेक्टर की कंपनियां भी तेजी से ऊर्जा बचत और टिकाऊ तकनीकों की ओर बढ़ रही हैं. Capgemini अपने वाहन बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ा रही है और IoT आधारित एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है. वहीं Infosys और RPG Group जैसी कंपनियां भी रिन्यूएबल एनर्जी और वर्चुअल सहयोग पर जोर दे रही हैं.
कॉरपोरेट जगत का कहना है कि ये कदम केवल मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए नहीं हैं, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा हैं. कंपनियां प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील को भी ध्यान में रख रही हैं, जिसमें जिम्मेदार उपभोग और संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया गया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय कंपनियों का यह “स्मार्ट खर्च मॉडल” कॉरपोरेट संस्कृति का स्थायी हिस्सा बन सकता है, जहां कम बजट में ज्यादा उत्पादकता हासिल करने पर पूरा फोकस रहेगा।