भारतीय स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग में आई भारी गिरावट, आर्थिक मंदी का दिखने लगा असर

KNEWS DESK:  भारत के लोग स्टार्टअप्स में पैसा निवेश करने से पीछे हट रहे हैं.अप्रैल माह में 58 डील में भारतीय स्टार्टअप्स मात्र 381 मिलियन डॉलर की फंडिंग दर्ज हुई है.यह नौ साल में सबसे कम फंडिंग है. इससे पहले अप्रैल 2014 में सबसे कम आंकड़ा था. देश के स्टार्टअप सेक्टर के लिए यह साल अच्छा साबित नहीं हुआ. दुनियाभर में जिस तरह से स्टार्टअप सेक्टर में छंटनी हुई है, उससे भारत भी बच नहीं पाया है. भारत के स्टार्टअप सेक्टर में भी इस साल करीब 15 हजार लोगों की नौकरियां जा चुकी है.

भारतीय निवेश के आंकड़े 

इस साल भारतीय निवेश में भारी गिरावट हुई हैं.फंडिंग और डील की संख्या अप्रैल में नौ साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है.इन कंपनियों के लिए यह बड़ी चुनौती होगी. अप्रैल में 58 डील में भारतीय स्टार्टअप्स में एंजल निवेश और वेंचर कैपिटल फंडिंग 381 मिलियन डॉलर रही है. रिसर्च के मुताबिक, यह नौ साल में सबसे कम फंडिंग है. इससे पहले अप्रैल 2014 में सबसे कम आंकड़ा था, जब 108 मिलियन डॉलर के 50 डील का एलान किया गया था. अप्रैल 2022 में भारतीय स्टार्टअप्स ने कुल 3.3 अरब डॉलर के 146 डील्स किए थे. वहीं 2023 में अब तक जुटाई गई कुल राशि अभी तक अकेले अप्रैल 2022 में दर्ज राशि के आसपास भी नहीं है.

साल 2021 रहा स्टार्टअप के लिए सबसे अच्छा 

 साल 2023 अप्रैल में भारतीय निवेश में फंडिंग कम होने लगी और यह आंकड़ा निचले स्तर पर पहुँच गया.भारत 2021 में 1 बिलियन डॉलर या उससे  ज्यादा के पैसे वाले स्टार्टअप्स ने अच्छी उछाल दर्ज की थी. हालांकि शेयर बाजार में सुधार होने के साथ ही केंद्रीय बैंक ने लोन का ब्याज भी बढ़ा दिया | यही नहीं फंडिंग अगर मिल भी रही है तो उसमें नई शर्तों को जोड़ा जा रहा है.जिस वजह से निवेशकों में कमी हो रही है.

 

फंडिंग में कमी क्यों हुई 

भारत ही नहीं दुनिया भर में आर्थिक मंदी की आशंका से लोग शेयर बाज़ार में निवेश नहीं कर रहे और साथ ही लोन के ब्याज में नुक्सान के कारण ग्राहक दूर हुए हैं.फंडिंग में कमी का ये सिलसिला अगले 2 से 3 साल तक जारी रह सकता है. इसकी एक बड़ी वजह लगातार बढ़ती ब्याज दरें हैं जिनके अगले साल के आखिर तक इसी तरह बढ़ने की संभावना है. ऐसे में अगले साल अगर मंदी की आशंका सच हो गई तो फिर स्टार्टअप्स के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो जाएगा   यही कारण है कि अच्छी स्टार्टअप्स कंपनियां भारी मात्रा में कर्मचारियों की कटौती कर रही हैं. वैसे भी वर्ल्ड बैंक दोनों ही ख़तरनाक मंदी की आशंका जाहिर कर चुके हैं .

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