नाना पाटेकर ने अपने दमदार अभिनय से हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई। ‘परिंदा’ के खतरनाक अन्ना शेठ से लेकर ‘वेलकम’ के मजेदार उदय शेट्टी तक, उन्होंने हर किरदार को अपने अंदाज में यादगार बनाया। आइए उनकी 11 फिल्मों के जरिए उनके अभिनय के अलग-अलग रंगों को याद करते हैं।
Knews Desk – नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर हर तरह के किरदार में अलग छाप छोड़ी। थिएटर और पैरेलल सिनेमा से अपने अभिनय की पहचान बनाने वाले नाना ने कभी विलेन बनकर दर्शकों को डराया, तो कभी एक आम आदमी के किरदार में व्यवस्था पर सवाल उठाए। कॉमेडी हो, पुलिस अधिकारी का रोल हो या फिर संवेदनशील किरदार, उनकी अदाकारी हर बार अलग नजर आई।
उनके अभिनय की खासियत यह थी कि किरदार चाहे कितना भी अलग क्यों न हो, उनके संवाद, हाव-भाव और पर्दे पर मौजूदगी उसे प्रभावशाली बना देते थे। उनकी फिल्मों में ऐसे कई किरदार हैं, जिन्हें दर्शक आज भी याद करते हैं। आइए जानते हैं उन 11 फिल्मों के बारे में, जिनमें नाना पाटेकर की अभिनय प्रतिभा के अलग-अलग रंग देखने को मिले।
‘प्रतिघात’ में नाना पाटेकर ने एक्स-कॉन्स्टेबल करमवीर का किरदार निभाया था। फिल्म में उनका किरदार अन्याय और अपराध के खिलाफ संघर्ष करता नजर आया। इस भूमिका में उनके जुनून और अभिनय की तीव्रता ने दर्शकों का ध्यान खींचा। यह फिल्म उनके प्रभावशाली अभिनय की शुरुआती मिसालों में गिनी जाती है।
‘सलाम बॉम्बे’ में नाना पाटेकर बाबा के किरदार में नजर आए थे। फिल्म में उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई, जिसके व्यक्तित्व में कई नकारात्मक पहलू थे। इस किरदार के जरिए उन्होंने अपने अभिनय की एक अलग छवि पेश की। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और इसे ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म की श्रेणी के लिए भारत की ओर से भेजा गया था।

‘तिरंगा’ में नाना पाटेकर ने पुलिस इंस्पेक्टर शिवाजी वाघले की भूमिका निभाई थी। फिल्म में राज कुमार जैसे दिग्गज कलाकार के साथ उनकी मौजूदगी खास रही। उनके आत्मविश्वास, संवाद अदायगी और दमदार अंदाज ने इस किरदार को यादगार बनाया।
‘क्रांतिवीर’ को नाना पाटेकर के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में गिना जाता है। इसमें उन्होंने प्रताप नारायण तिलक नाम के एक आम आदमी का किरदार निभाया था, जो अन्याय और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाता है। इस फिल्म में उनके संवाद और अभिनय की तीव्रता ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा। इस भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान भी मिला।
‘परिंदा’ में नाना पाटेकर ने अन्ना शेठ नाम के खतरनाक गैंगस्टर की भूमिका निभाई थी। उनके अभिनय ने इस नकारात्मक किरदार को बेहद प्रभावशाली बना दिया। फिल्म में जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर जैसे कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद नाना पाटेकर का किरदार अपनी अलग छाप छोड़ने में सफल रहा। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘यशवंत’ में नाना पाटेकर ने इंस्पेक्टर यशवंत लोहार की भूमिका निभाई थी। इस किरदार में उन्होंने एक ऐसे पुलिस अधिकारी को पर्दे पर उतारा, जो अपने काम और सिद्धांतों को लेकर बेहद गंभीर है। फिल्म का संवाद ‘साला एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है’ काफी लोकप्रिय हुआ और आज भी उनके चर्चित संवादों में शामिल है।

‘शक्ति’ में नाना पाटेकर ने नरसिम्हा नाम के एक ताकतवर और कठोर व्यक्ति का किरदार निभाया था। उनका चरित्र हिंसा और दबदबे के बीच जीता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ उसके व्यक्तित्व के दूसरे पहलू भी सामने आते हैं। इस भूमिका में नाना ने अपने अभिनय के जरिए एक जटिल चरित्र को प्रभावशाली ढंग से पेश किया।
‘अब तक छप्पन’ में नाना पाटेकर ने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट साधु अगाशे की भूमिका निभाई थी। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी के इस किरदार में उनका सख्त और नियंत्रित अंदाज दर्शकों को पसंद आया। फिल्म में उनकी संवाद अदायगी और गंभीर अभिनय को काफी सराहना मिली। बाद में इसका दूसरा भाग भी रिलीज हुआ।
‘वेलकम’ में नाना पाटेकर ने उदय शेट्टी का किरदार निभाकर अपनी कॉमेडी का अलग अंदाज दिखाया। गैंगस्टर की छवि वाला यह किरदार अपने गुस्से, अजीब परिस्थितियों और मजेदार संवादों के कारण दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। अनिल कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री और संवादों की टाइमिंग ने फिल्म को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई।
‘द अटैक ऑफ 26/11’ में नाना पाटेकर ने मुंबई पुलिस के अधिकारी राकेश मारिया का किरदार निभाया था। फिल्म में उन्होंने 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान सामने आई भयावह परिस्थितियों और पुलिस अधिकारी के मानसिक संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से पेश किया। उनके गंभीर अभिनय ने फिल्म के भावनात्मक पक्ष को मजबूत बनाया।

‘द वैक्सीन वॉर’ में नाना पाटेकर ने वैज्ञानिक प्रोफेसर बलराम भार्गव की भूमिका निभाई थी। फिल्म कोरोना महामारी के दौरान भारत में वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों पर आधारित थी। इस किरदार में उन्हें एक ऐसे वैज्ञानिक के रूप में दिखाया गया, जिसे कठिन परिस्थितियों में अपनी टीम का नेतृत्व करना था। नाना ने अपने संयमित अभिनय से इस भूमिका को अलग पहचान दी।
नाना पाटेकर की इन फिल्मों से साफ होता है कि उनकी अभिनय क्षमता किसी एक शैली तक सीमित नहीं थी। उन्होंने खलनायक, पुलिस अधिकारी, आम आदमी, गैंगस्टर और कॉमेडी किरदारों को अपने अंदाज में जीवंत बनाया। उनके निभाए किरदार और संवाद हिंदी सिनेमा में लंबे समय तक याद किए जाते रहेंगे।