नाना पाटेकर ने थिएटर से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्मों में एंट्री के पीछे अभिनेत्री और उनकी करीबी दोस्त स्मिता पाटिल की भी अहम भूमिका रही।
Knews Desk – बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के चलते निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 को उन्होंने आखिरी सांस ली। नाना पाटेकर गोवा स्थित अपने घर में बेहोश पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। उनके निधन की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके करोड़ों फैंस सदमे में हैं।
नाना पाटेकर ने करीब 48 साल तक फिल्मी दुनिया में काम किया। उन्होंने ऐसे दौर में अपनी पहचान बनाई, जब फिल्मों में बड़ा स्टार बनने के लिए पारंपरिक हीरो वाली शक्ल और कद-काठी को काफी अहम माना जाता था। नाना के पास न तो कोई फिल्मी विरासत थी और न ही कोई गॉडफादर। इसके बावजूद उन्होंने अपने अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में ऐसी जगह बनाई, जिसे आने वाली पीढ़ियों ने भी मिसाल माना।
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर थिएटर से शुरू हुआ था। मुंबई में थिएटर करते हुए वह अपनी प्रतिभा के लिए पहचाने जाने लगे थे। इसी दौरान निर्देशक सई परांजपे उनके पास फिल्म का प्रस्ताव लेकर पहुंचीं। यह फिल्म ‘गमन’ थी, जिससे मुजफ्फर अली निर्देशन में डेब्यू कर रहे थे।
सई परांजपे ने नाना के सामने फिल्म में काम करने का प्रस्ताव रखा और उन्होंने इसके लिए हामी भर दी। साल 1978 में रिलीज हुई ‘गमन’ नाना पाटेकर की पहली हिंदी फिल्म बनी। इसमें फारूक शेख और स्मिता पाटिल मुख्य भूमिकाओं में थे, जबकि नाना ने वासु का किरदार निभाया था।
हालांकि, फिल्म में काम करने के बाद भी नाना का फिल्मों की तरफ कोई खास झुकाव नहीं था। उन्हें थिएटर में ही सुकून मिलता था। पुणे में थिएटर के दौरान उनकी दोस्ती स्मिता पाटिल से हुई थी। उस समय तक स्मिता फिल्मों में अपनी पहचान बना चुकी थीं और नाना की अभिनय प्रतिभा से अच्छी तरह परिचित थीं।
स्मिता पाटिल ने नाना को फिल्मों में काम करने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। उन्होंने उन्हें फिल्मों में मिलने वाले पैसे और शोहरत के बारे में बताया और बॉलीवुड में काम करते रहने के लिए प्रेरित किया।
साल 1984 में आई फिल्म ‘आज की आवाज’ में भी स्मिता पाटिल ने नाना पाटेकर के नाम की सिफारिश निर्देशक रवि चोपड़ा से की थी। फिल्म में राज बब्बर और स्मिता पाटिल मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म में नाना को पहली बार एक अहम किरदार मिला और उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों और इंडस्ट्री का ध्यान खींचा।
इसके बाद नाना पाटेकर ने ‘गिद्ध’ जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन साल 1986 में एन. चंद्रा के निर्देशन में बनी ‘अंकुश’ को उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। फिल्म में उनके रवि नाम के किरदार को काफी पसंद किया गया और यहीं से नाना की इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बनने लगी।
इसके बाद ‘तृषाग्नि’, ‘आवाम’, ‘प्रतिघात’ और ‘अंधा युद्ध’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी का दम दिखाया। आगे चलकर ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर तक पहुंचाया।
नाना पाटेकर ने कई इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था कि अगर स्मिता पाटिल उनका साथ नहीं देतीं, तो शायद वह फिल्मों में कभी नहीं आते। दोनों ने ‘गमन’, ‘आज की आवाज’, ‘आवाम’, ‘गिद्ध’ और ‘सूत्रधार’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया था।
दोनों की दोस्ती सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। नाना ने एक बार बताया था कि उन्हें गाड़ी चलाना भी स्मिता पाटिल ने ही सिखाया था। नाना को शुरुआत में गाड़ी चलाने में डर लगता था, तब स्मिता उन्हें भरोसा दिलाती थीं कि कुछ नहीं होगा।
आज दोनों कलाकार इस दुनिया में नहीं हैं। स्मिता पाटिल ने महज 31 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था और अब नाना पाटेकर भी हमारे बीच नहीं रहे। हालांकि, नाना ने आखिरी वक्त तक स्मिता पाटिल के योगदान को याद रखा और उनके प्रति अपना सम्मान जाहिर करते रहे।
नाना पाटेकर का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है। उनके साथ थिएटर से निकलकर हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाले उस दौर का एक और मजबूत अध्याय खत्म हो गया, जिसने भारतीय सिनेमा को अभिनय की एक अलग भाषा दी।