US‑Israel और Iran संघर्ष: सऊदी अरब के रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, CIA स्टेशन भी निशाने पर

KNEWS DESK- मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रियाद में स्थित Embassy of the United States, Riyadh पर ड्रोन हमले की खबर ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में एक ड्रोन ने दूतावास परिसर को निशाना बनाया।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि दूतावास के भीतर मौजूद Central Intelligence Agency (CIA) स्टेशन को सीधे लक्ष्य बनाया गया था या नहीं। CIA ने घटना पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दूतावास परिसर की ओर दो ड्रोन भेजे गए थे। हमले के बाद हल्की आग लगने और कुछ भौतिक नुकसान की पुष्टि हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इमारत की छत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और अंदर धुआं भर गया, जिससे कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।

एहतियातन, अमेरिकी प्रशासन ने सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों को अगली सूचना तक दूतावास से दूर रहने की सलाह दी है। नियमित और आपातकालीन वीज़ा व नागरिक सेवाओं की अपॉइंटमेंट अस्थायी रूप से रद्द कर दी गई हैं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में ईरान पर संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। सैन्य गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और संभावित जवाबी हमलों की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब, लेबनान और कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावासों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि आगे भी ड्रोन या मिसाइल हमले हो सकते हैं।

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने धहरान क्षेत्र के ऊपर मिसाइल और UAV (मानवरहित हवाई वाहन) हमलों का खतरा बताया है। वहां स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट को फिलहाल आम लोगों के लिए बंद रखा गया है। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दूतावास परिसर में मौजूद CIA स्टेशन को दोबारा निशाना बनाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

तनाव बढ़ने के बीच ईरान ने सऊदी अरब के मक्का और मदीना में रह रहे अपने लगभग 9,000 नागरिकों को स्वदेश लौटने की सलाह दी है। यह कदम संभावित सैन्य टकराव की आशंका को दर्शाता है।

ईरान और अमेरिका के बीच अविश्वास का इतिहास पुराना है। 1953 में ईरान के तत्कालीन प्रधानमंत्री को हटाने वाले तख्तापलट में अमेरिकी भूमिका को लेकर तेहरान लंबे समय से CIA को अपना प्रमुख विरोधी मानता रहा है। वर्तमान घटनाक्रम उसी ऐतिहासिक तनाव की नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

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