Knews Desk– अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर बड़ा तनाव पैदा हो गया है. दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद अमेरिका ने कनाडाई सामानों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने का फैसला किया है. इसके जवाब में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है. उन्होंने साफ संकेत दिया है कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब उसी अंदाज में देगा. इस व्यापारिक टकराव का असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है.
वाशिंगटन में तीन दिनों तक अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों के बीच गहन बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्ष किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके. इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपने वार्ताकारों को वापस ओटावा बुला लिया. अमेरिका करीब 28 अरब कनाडाई डॉलर यानी लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में है. यह नया शुल्क आधी रात से लागू होने की बात कही गई है.इस विवाद की शुरुआत जुलाई में हुई थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1930 के टैरिफ एक्ट के सेक्शन 338 का इस्तेमाल किया था. इस प्रावधान के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति उन देशों से आने वाले सामानों पर 50 फीसदी तक आयात शुल्क लगा सकते हैं, जिन पर अमेरिकी व्यापार के साथ भेदभाव करने का आरोप हो. बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप ने इस फैसले को कुछ समय के लिए रोक दिया था, लेकिन अब वह समयसीमा खत्म हो चुकी है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के इस कदम पर कड़ा रुख अपनाया है. उनका कहना है कि अमेरिका की व्यापार नीति बदल चुकी है और अब वह अपने करीबी सहयोगियों से भी अपने बाजार तक पहुंच के लिए कीमत वसूल रहा है. ऐसे में कनाडा को अपने कामगारों, छोटे और मध्यम कारोबारियों तथा घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा करनी होगी. कनाडा पहले ही कारोबारियों को करीब 25 अरब कनाडाई डॉलर की सहायता दे चुका है और आगे भी राहत पैकेज लाने की तैयारी कर रहा है.हालांकि अमेरिका इस पूरे मामले को अलग नजरिए से देखता है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर का दावा है कि कनाडा को बेहद बेहतर व्यापार प्रस्ताव दिया गया था. अमेरिका के मुताबिक, बातचीत में कनाडाई कारों पर टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी करने और स्टील तथा एल्युमिनियम पर शुल्क को 50 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने की पेशकश की गई थी. लेकिन अमेरिकी शराब और डेयरी उत्पादों से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी.
कनाडा अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने की रणनीति पर भी काम कर रहा है. प्रधानमंत्री कार्नी का कहना है कि देश व्यापार के नए रास्ते तलाश रहा है और अर्थव्यवस्था को ज्यादा विविध बनाने की कोशिश की जा रही है. कनाडा में करीब 500 अरब कनाडाई डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. सरकार का दावा है कि कनाडा इस समय अमेरिका की तुलना में करीब चार गुना तेजी से नौकरियां पैदा कर रहा है.अगर दोनों देशों के बीच टैरिफ युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर कारोबार, रोजगार और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ सकता है. अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, इसलिए लंबे समय तक चलने वाला टकराव दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौती बन सकता है. फिलहाल दोनों देशों के रुख से साफ है कि व्यापार युद्ध खत्म होने के बजाय और गहरा सकता है.