मुज्तबा के इशारे के बिना नहीं होगा समझौता…ईरान का साफ संदेश, ट्रंप का सीजफायर प्लान फेल

KNEWS DESK – मध्य पूर्व की सियासत में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां Donald Trump के सीजफायर प्लान को ईरान ने झटका दे दिया है। अमेरिकी प्रशासन ईरान के भीतर राजनीतिक समीकरण साधकर युद्धविराम की राह निकालने की कोशिश में था, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इस रणनीति पर पानी फेर दिया है।

ट्रंप का क्या था प्लान?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf को आगे कर सीजफायर कराने की योजना बना रहा था। माना जा रहा था कि गालिबफ की पकड़ Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) में मजबूत है, जिससे वे इस डील को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते थे।

इतना ही नहीं, अमेरिकी रणनीति में उन्हें भविष्य के संभावित सर्वोच्च नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करने की भी बात सामने आई थी। इस दिशा में JD Vance के जरिए बातचीत की तैयारी भी चल रही थी।

ईरान ने कैसे पलट दिया गेम?

इस बीच ईरान के सत्ता केंद्र से ऐसा फैसला आया जिसने पूरे समीकरण बदल दिए। Mojtaba Khamenei की सिफारिश पर Baqer Zolqadr को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) का नया सचिव नियुक्त किया गया है।

जोलकद्र पहले IRGC में जनरल रह चुके हैं और उन्हें Ali Khamenei का करीबी माना जाता है। उनकी नियुक्ति को ईरान के पावर स्ट्रक्चर का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

यह नियुक्ति क्यों अहम है?

इस कदम के कई बड़े मायने निकाले जा रहे हैं:

  • सिस्टम का संदेश: ईरान ने यह दिखाने की कोशिश की है कि वहां फैसले किसी एक व्यक्ति नहीं, बल्कि मजबूत संस्थागत सिस्टम के जरिए लिए जाते हैं।
  • अमेरिका को संकेत: यह नियुक्ति बताती है कि बाहरी दबाव या राजनीतिक कोशिशों से ईरान की आंतरिक सत्ता संरचना प्रभावित नहीं होगी।
  • सुप्रीम लीडर की भूमिका: अंतिम निर्णय अब भी सुप्रीम लीडर के इशारे पर ही निर्भर है, जो किसी भी समझौते की दिशा तय करेगा।

विदेश मंत्री का बयान

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी हाल ही में कहा था कि उन्हें नहीं पता कि सुप्रीम लीडर समझौते को लेकर क्या रुख अपनाएंगे। उन्होंने साफ किया कि जब तक शीर्ष नेतृत्व का स्पष्ट संदेश नहीं आता, तब तक स्थिति अस्पष्ट ही रहेगी।

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