KNEWS DESK- राजस्थान के जालोर जिले का धानोल गांव इन दिनों एक खास वजह से चर्चा में है। यहां कारोबारी और रेलवे ठेकेदार नरेंद्र पुरोहित अपनी गाय ‘राधा’ के प्रति अनोखी आस्था और समर्पण के लिए सुर्खियों में हैं। कांकरेज नस्ल की इस गाय को पुरोहित परिवार का सदस्य मानते हैं। विशेष धार्मिक अवसरों पर राधा का करीब 10 किलो चांदी के आभूषणों से श्रृंगार किया जाता है, जिनकी कीमत लगभग 24 लाख रुपये बताई जा रही है।
इतना ही नहीं, राधा के लिए करीब एक करोड़ रुपये की लागत से दो मंजिला ‘राधा महल’ भी तैयार कराया जा रहा है। करीब 200 गज जमीन पर बन रहे इस भवन का निर्माण नवंबर 2025 में शुरू हुआ था और इसके आने वाले महीनों में पूरा होने की उम्मीद है।
राधा के आने के बाद बदली जिंदगी
नरेंद्र पुरोहित के मुताबिक, राधा वर्ष 2019 में उनके घर आई थी। उनका दावा है कि उस समय वह करीब 1,500 रुपये महीने की नौकरी करते थे। राधा के घर आने के बाद उनके कारोबार में लगातार तरक्की हुई।
आज वह कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाने के साथ रेलवे के ठेके भी लेते हैं। इसी वजह से उनके परिवार ने राधा को विशेष स्थान दिया है। पुरोहित का कहना है कि राधा उनके लिए सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा है।
कैसा है ‘राधा महल’?
राधा के लिए बन रहे दो मंजिला भवन का ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह उसके लिए तैयार किया जा रहा है। यहां उसके घूमने, चारा खाने और आराम करने की व्यवस्था होगी। भवन में साधु-संतों के ठहरने के साथ हवन और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए भी अलग स्थान बनाए जा रहे हैं।
नरेंद्र पुरोहित बताते हैं कि पहले राधा उनके घर में ही रहती थी। परिवार के लोग उस स्थान को ‘गोमाता का महल’ कहते थे। हालांकि, लोगों की अलग-अलग टिप्पणियों के बाद उन्होंने उसके लिए अलग भवन बनाने का फैसला किया।
24 लाख के चांदी के गहनों से होता है श्रृंगार
राधा के लिए विशेष आभूषण भी तैयार करवाए गए हैं। इनमें गले की कंठी, माथे का स्वर्ण आभूषण और अन्य गहने शामिल हैं। धार्मिक पर्वों, खासकर जन्माष्टमी जैसे अवसरों पर राधा का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
उसकी देखभाल के लिए सात लोग नियमित रूप से सेवा में लगे रहते हैं। परिवार का कहना है कि राधा की देखभाल और गोसेवा उनके लिए धार्मिक आस्था का हिस्सा है।
राधा और नंदी का कराया गया था विवाह
नरेंद्र पुरोहित के मुताबिक, वर्ष 2021 में राधा का विवाह सांचौर स्थित पथमेड़ा गोशाला में एक नंदी से धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ कराया गया था। इस समारोह में धानोल गांव के कई लोग बाराती बनकर शामिल हुए थे।
विवाह के बाद गाय और नंदी को विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कराए गए। पुरोहित का कहना है कि उनके परिवार में गायों के प्रति श्रद्धा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी परिवार गोसेवा को अपनी बड़ी जिम्मेदारी मानता है।
राधा के लिए चांदी के लाखों रुपये के आभूषण और करोड़ों की लागत से तैयार हो रहा विशेष भवन अब इलाके में आकर्षण का केंद्र बन गया है।