Knews Desk– इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली में MSc फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के बाद कैंपस में उठे सवालों के बीच संस्थान ने जांच के लिए नई 7 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त जज जस्टिस मुक्ता गुप्ता करेंगी। समिति में AIIMS नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. प्रताप शरण को भी शामिल किया गया है।
नई समिति में चार छात्र प्रतिनिधियों को जगह दी गई है। इसके अलावा IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार भी समिति का हिस्सा होंगे। रजिस्ट्रार समिति के सचिव और संयोजक की जिम्मेदारी संभालेंगे। संस्थान ने कमेटी को पूरे मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
इससे पहले IIT दिल्ली ने इस मामले की जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति बनाई थी। इस समिति की अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व DGP और IIT दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार को सौंपी गई थी। समिति में AIIMS के प्रो. प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार शामिल थे। हालांकि, समिति के गठन के अगले ही दिन रिटायर्ड IAS अशोक कुमार ने अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद संस्थान ने नई समिति गठित करते हुए जस्टिस मुक्ता गुप्ता को इसका अध्यक्ष बनाया।नई समिति संबंधित छात्रों, फैकल्टी सदस्यों और प्रशासनिक कार्यालयों से बातचीत करेगी। इसके अलावा IIT दिल्ली में लागू प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जाएगी। समिति मामले से जुड़े तथ्यों और संस्थान की मौजूदा व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद जरूरी सुधारों को लेकर अपनी सिफारिशें देगी।
ऋषिकेश कुमार की कथित आत्महत्या के बाद सोमवार को IIT दिल्ली कैंपस में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने डीन स्टूडेंट अफेयर्स और फिजिक्स विभाग के प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए और दोनों के इस्तीफे की मांग की। छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई थी।प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से ऋषिकेश के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की गई। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि स्टूडेंट अफेयर्स ऑफिस की ओर से ऋषिकेश की कथित तौर पर मोरल प्रोफाइलिंग की गई थी। इसके अलावा प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह दावा भी किया कि ऋषिकेश को हॉस्टल की सुविधा नहीं दी गई थी।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि ऋषिकेश कुमार OBC समुदाय से आते थे और उन्हें कथित तौर पर हॉस्टल सुविधा से वंचित रखा गया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। अब नई समिति के सामने इन सभी पहलुओं की जांच करना अहम होगा।IIT दिल्ली की नई समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मामले से जुड़े घटनाक्रम क्या थे, संस्थान की प्रक्रियाओं में कोई कमी थी या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन सुधारों की जरूरत है। समिति की दो सप्ताह की समयसीमा में आने वाली रिपोर्ट पर अब छात्रों, परिवार और संस्थान से जुड़े लोगों की नजर रहेगी।