भारत की LPG रणनीति: खाड़ी निर्भरता घटाकर अमेरिका व अन्य देशों से सप्लाई बढ़ाने की बड़ी योजना

Knews Desk- भारत अब अपनी एलपीजी (LPG) आपूर्ति रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है, जिसका उद्देश्य खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। इसी दिशा में सरकार अमेरिका सहित अन्य देशों से एलपीजी आयात बढ़ाने, नए सप्लायर जोड़ने और 30 दिन का रणनीतिक गैस भंडार (strategic reserve) तैयार करने पर काम कर रही है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैश्विक संकट, युद्ध या सप्लाई बाधा की स्थिति में देश में घरेलू गैस की कमी न हो और कीमतें स्थिर बनी रहें।

भारत वर्तमान में अपनी LPG जरूरत का लगभग 60-65% हिस्सा आयात करता है, जिसका बड़ा भाग अब तक सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री मार्गों पर जोखिम और सप्लाई चेन में अनिश्चितता ने सरकार को वैकल्पिक स्रोतों की ओर देखने पर मजबूर किया है। इसी कारण अमेरिका से एलपीजी आयात तेजी से बढ़ाया जा रहा है, जो फिलहाल भारत के सबसे बड़े गैर-खाड़ी सप्लायर्स में से एक बन चुका है।

सरकार की इस रणनीति का पहला बड़ा उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। यदि किसी एक क्षेत्र में युद्ध, प्रतिबंध या सप्लाई बाधा आती है, तो भारत की गैस आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए स्रोतों का विविधीकरण किया जा रहा है। खाड़ी देशों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पहले भी वैश्विक संकट के समय सप्लाई प्रभावित होने का खतरा देखा गया है, जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है।

दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सप्लाई चेन जोखिम को कम करना है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है, जो किसी भी तनाव की स्थिति में बाधित हो सकता है। ऐसे में अमेरिका, अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से सप्लाई जोड़कर भारत एक मजबूत बैकअप सिस्टम तैयार कर रहा है। इससे किसी एक रूट या क्षेत्र पर संकट का असर कम होगा और घरेलू बाजार स्थिर रहेगा।

तीसरा फायदा यह है कि ज्यादा सप्लायर्स होने से भारत की मोलभाव करने की क्षमता बढ़ेगी। दुनिया का सबसे बड़ा LPG आयातक होने के नाते भारत जब कई देशों से खरीद करेगा, तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतों, शिपमेंट शर्तों और लंबे कॉन्ट्रैक्ट्स में बेहतर डील मिल सकती है। इससे दीर्घकाल में आयात लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

चौथा पहलू रणनीतिक और आर्थिक संबंधों से जुड़ा है। अमेरिका पहले से ही भारत का एक प्रमुख ऊर्जा साझेदार है, जहां से कच्चा तेल, एलएनजी और अब तेजी से एलपीजी का आयात बढ़ रहा है। इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार मजबूत हो रहा है और व्यापक व्यापारिक रिश्तों को भी गति मिल रही है। यह सहयोग ऊर्जा निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों तक भी फैल रहा है।

हालांकि, इस रणनीति की एक बड़ी चुनौती लागत भी है। अमेरिका से एलपीजी की ढुलाई में खाड़ी देशों की तुलना में ज्यादा समय लगता है—जहां खाड़ी से सप्लाई 4 से 10 दिन में पहुंचती है, वहीं अमेरिका से इसमें 30 से 40 दिन लग सकते हैं। लंबी दूरी के कारण शिपिंग खर्च और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ जाती है। हालांकि, कभी-कभी अमेरिका में कम कीमतें इस अतिरिक्त खर्च को संतुलित कर देती हैं, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में यह विकल्प थोड़ा महंगा साबित हो सकता है। भारत की यह नई LPG रणनीति ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई विविधीकरण और दीर्घकालिक स्थिरता पर केंद्रित है, जिसका लक्ष्य भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट से देश की गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखना है।

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