राज्यपाल बोलीं-हम पढ़-लिख गए…लेकिन जाति-पाति से बाहर नहीं निकल पाए: राजर्षि टंडन यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट को मिले गोल्ड मेडल, डिजिलॉकर में डिग्रियां अपलोड

प्रयागराज में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा- हम आज इतने पढ़े-लिखे हो गए हैं, लेकिन जाति-पाति से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ये बातें शुक्रवार को राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (यूपीआरटीओयू) के 21वें दीक्षांत समारोह में कहीं।

समारोह में राज्यपाल ने एक प्रेरक घटना सुनाते हुए कहा- एक सब्जी बेचने वाला रोज की तरह ठेला लगाकर घर लौट रहा था। रास्ते में झाड़ियों से नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। तलाश करने पर उसे कपड़े में लिपटी दो-तीन दिन की बच्ची मिली, जिसे कोई वहां छोड़ गया था।

उन्होंने बताया कि गरीब ठेलेवाला बच्ची को अपने साथ जिला अधिकारी के पास ले गया और कहा कि वह उसका पालन-पोषण करना चाहता है। उसने न जाति देखी, न धर्म और न ही अपना-पराया। उसने बच्ची को अपनी बेटी बनाकर पाला, पढ़ाया-लिखाया और उसे अच्छी शिक्षा दिलाई। आगे चलकर वही बच्ची अधिकारी बन गई।

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने अखबार में उस सब्जी विक्रेता और अधिकारी बनी बेटी की तस्वीर देखी थी। समाज में ऐसे उदाहरण भी हैं, जो मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हैं। लोगों को जाति-पाति के भेद से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता देनी चाहिए।

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और उपाधियां भी प्रदान कीं। कुल 18 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिए गए, जिनमें 12 छात्राएं और 6 छात्र शामिल रहे। इसके अलावा 30,886 डिग्रियां डिजिटल माध्यम से अपलोड की गईं।

समारोह में पद्मश्री एवं लोकगायिका मालिनी अवस्थी मुख्य अतिथि रहीं। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम, शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

‘मां के नाम एक पेड़’ सिर्फ अभियान नहीं

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘मां के नाम एक पेड़’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश है। उन्होंने कहा कि लाखों-करोड़ों लोग अपनी मां के नाम पर पौधे लगा रहे हैं, लेकिन कुछ लोग अभी भी इस अभियान की भावना को नहीं समझ पाए हैं। राज्यपाल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ वृद्धाश्रमों की जरूरत कम करना और परिवार में माता-पिता का सम्मान बढ़ाना भी है।

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