सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस: बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 22 आरोपियों को बरी करने का आदेश बरकरार, भाइयों की अपील खारिज

डिजिटल डेस्क- देश के सबसे चर्चित और विवादित मामलों में से एक, सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने साल 2005 के इस एनकाउंटर मामले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सभी 22 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने सोहराबुद्दीन के भाइयों, रुबाबउद्दीन और नायबउद्दीन द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बेंच ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने का फैसला सही था और इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। इस फैसले के साथ ही 21 पुलिसकर्मियों सहित सभी 22 आरोपियों को मिली राहत बरकरार रहेगी।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला 23 नवंबर 2005 की घटना से जुड़ा है। आरोप था कि गुजरात और राजस्थान पुलिस की एक संयुक्त टीम ने सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी का अपहरण किया और बाद में एक कथित ‘फेक एनकाउंटर’ में सोहराबुद्दीन को मार गिराया। इस घटना के कुछ समय बाद, इस मामले के मुख्य गवाह और सोहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की भी एक अन्य एनकाउंटर में मौत हो गई थी। कौसर बी का शव कभी बरामद नहीं हो सका, जिसे लेकर लंबे समय तक कानूनी और राजनीतिक विवाद बना रहा।

याचिकाकर्ताओं का अगला कदम

याचिकाकर्ताओं के वकील ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “बॉम्बे हाई कोर्ट ने हमारी अपील खारिज कर दी है। फिलहाल हमारे पास सिर्फ ऑपरेटिव ऑर्डर आया है, विस्तृत आदेश आने के बाद ही हमें उन आधारों का पता चलेगा जिनकी वजह से याचिका खारिज की गई।” वकील ने आगे बताया कि वह रुबाबुद्दीन शेख से चर्चा करेंगे कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाना है या नहीं, क्योंकि उनके परिवार ने पिछले कई सालों में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है।

CBI ने पहले ही स्वीकार कर लिया था फैसला

दिलचस्प बात यह है कि हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले रुबाबुद्दीन ने गृह मंत्रालय और सीबीआई को पत्र लिखकर सरकार से इस फैसले को चुनौती देने का अनुरोध किया था। हालांकि, सीबीआई ने हाई कोर्ट में स्पष्ट कर दिया था कि उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले को स्वीकार कर लिया है और वह इसे चुनौती देने का कोई इरादा नहीं रखती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *