डिजिटल डेस्क- ईरान में राजनीतिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। देशभर में धार्मिक नेतृत्व और सत्ता के खिलाफ चल रहा जनआंदोलन बीते दो हफ्तों में सबसे हिंसक दौर में पहुंच गया है। शुक्रवार रात प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में जमकर उत्पात मचाया, जिसके बाद सरकार ने हालात को काबू में करने के लिए पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं। शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, बेरोजगारी और ईरानी रियाल की गिरती कीमत के खिलाफ था, लेकिन धीरे-धीरे यह सीधे सरकार और धार्मिक नेतृत्व को चुनौती देने वाले व्यापक विरोध में बदल गया। अब यह आंदोलन सिर्फ राजधानी तेहरान तक सीमित नहीं रहा। मशहद, कोम, इस्फ़हान, मशिरियेह, कजविन, बुशहर और वज्द जैसे बड़े शहरों में भी हिंसक प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर आगजनी की, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार को सुरक्षा कारणों से इंटरनेट पूरी तरह बंद करना पड़ा है, ताकि प्रदर्शनकारियों के आपसी संपर्क और सूचनाओं के प्रसार को रोका जा सके।
अबतक हो चुके 5 लाख से अधिक लोग शामिल
तेहरान के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर टाइम मैगजीन को बताया कि राजधानी के केवल छह अस्पतालों में ही कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से अधिकांश की मौत गोली लगने से हुई। यह आंकड़ा आंदोलन की भयावहता और हिंसा के स्तर को दर्शाता है। प्रदर्शन शुरू हुए अब 14 दिन से ज्यादा हो चुके हैं और इसमें अब तक 5 लाख से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 400 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। झड़पों में अकेले तेहरान में 217 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 14 सुरक्षाकर्मी भी मारे गए हैं। इसके अलावा 2,000 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं और पुलिस ने अब तक लगभग 2,300 लोगों को हिरासत में लिया है।
20 प्रांतों समेत 110 शहरों में चालू है प्रदर्शन
ईरान के 20 प्रांतों में हालात विद्रोह जैसे बन चुके हैं। 110 से अधिक शहरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगह अस्पतालों में भी तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों ने बासिज और IRGC कैंप पर हमले किए, तेहरान में 26 बैंकों को लूटा गया, 25 मस्जिदों में आग लगा दी गई और 10 सरकारी इमारतें पूरी तरह खाक हो चुकी हैं। इसके अलावा 24 अपार्टमेंट, 48 दमकल गाड़ियां और 42 बसें भी जला दी गई हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी बंद कर दिए गए हैं, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने सरकारी टीवी पर कहा कि राजधानी में हुए दंगों से शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि एक अस्पताल, दो मेडिकल सेंटर, दर्जनों बैंक, मस्जिदें और सुरक्षा चौकियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। उनके मुताबिक, इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें नुकसान की मरम्मत में जुटी हैं, लेकिन हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।