उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व विधायक सिनोद शाक्य को लेकर सोमवार को दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया। दोपहर में वह अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए, जबकि देर शाम जारी भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची में भी उनका नाम दिखाई दिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं।
Knews Desk- उत्तर प्रदेश में सोमवार को बदायूं की दातागंज सीट से पूर्व विधायक सिनोद शाक्य के राजनीतिक बदलाव को लेकर चर्चा रही। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। सिनोद शाक्य अपने समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए। हालांकि, देर शाम भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची जारी हुई, जिसमें उनका नाम भी शामिल था।
एक ही दिन में दोनों घटनाक्रम सामने आने से सवाल उठने लगे। माना जा रहा है कि भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की सूची पहले ही तैयार कर ली गई थी और सिनोद शाक्य के सपा में शामिल होने की घटना बाद में हुई। हालांकि, इस संबंध में सूची तैयार होने की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सिनोद शाक्य का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। वह 2007 और 2012 में दातागंज विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के विधायक चुने गए थे। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का दामन थाम लिया था। बताया जाता है कि भाजपा में उचित सम्मान नहीं मिलने और दातागंज से टिकट की मांग को लेकर वह नाराज चल रहे थे।
सोमवार को सपा में शामिल होने वाले नेताओं में पूर्व आईएएस अधिकारी राम बहादुर पासी, मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के पूर्व प्रत्याशी दारा सिंह प्रजापति और बदायूं की बिसौली सीट से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर भी शामिल रहे। अखिलेश यादव ने सभी नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं के पार्टी में आने से सपा को मजबूती मिलेगी और आगामी चुनावों में पार्टी को फायदा होगा।