डिजिटल डेस्क- ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन रविवार को 14वें दिन में प्रवेश कर गए हैं और देशभर में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। राजधानी तेहरान से लेकर छोटे शहरों तक प्रदर्शन जारी हैं, और सुरक्षा बल लगातार सड़कों पर नजर बनाए हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ की और न्यायिक और सरकारी भवनों पर हमला किया। फार्स प्रांत के ममासानी काउंटी में प्रदर्शनकारियों ने न्यायपालिका परिसर में घुसकर आग लगाई, जिससे कोर्ट के कई कमरों में नुकसान हुआ। सुरक्षाबलों ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कार्रवाई की, लेकिन गुस्साए प्रदर्शनकारियों को हटाना चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। सरकार ने इस तनावपूर्ण स्थिति को काबू में करने के लिए देशभर में इंटरनेट 60 घंटे से अधिक समय तक बंद कर दिया। इंटरनेट बंद करने का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय और सोशल मीडिया के जरिए विरोध के फैलाव को रोकना है। नेटब्लॉक्स जैसी इंटरनेट निगरानी एजेंसियों के अनुसार, ईरान में ऑनलाइन नेटवर्क बंदी ने लोगों के कनेक्शन को पूरी तरह से प्रभावित किया है।
अमेरिका की तरफ से ईरान को दी गई चेतावनी
इस बीच, अमेरिका की ओर से ईरान पर संभावित दखल को लेकर चेतावनी आई, जिसने तेहरान की राजनीति में उबाल पैदा कर दिया। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने अमेरिकी चेतावनी पर कड़ा पलटवार किया। कालिबाफ को ईरान की कट्टरपंथी राजनीति का प्रमुख चेहरा माना जाता है और उन्होंने पहले राष्ट्रपति पद के लिए भी चुनाव लड़ा है। संसद में अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यदि किसी तरह का हमला हुआ तो अमेरिकी सेना और इजराइल ईरान के वैध निशाने होंगे। कालिबाफ ने सुरक्षा बलों और रिवॉल्यूशनरी गार्ड की तारीफ करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा और गिरफ्तार किए गए लोगों को सजा दी जाएगी। संसद में अमेरिका विरोधी नारे भी लगे। कई सांसद आसन तक पहुंचकर ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे लगाने लगे। कालिबाफ ने स्पष्ट कहा कि ईरान पर किसी भी संभावित हमले की स्थिति में इजराइल को कब्जे वाला क्षेत्र मानकर वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, अड्डों और जहाजों को निशाना बनाया जाएगा। यह पहली बार है जब ईरानी नेतृत्व ने इतने खुले शब्दों में संभावित हमले के लक्ष्यों की जानकारी दी।
प्रदर्शनकारियों के उबाल के चलते इजरायल में भी हाई अलर्ट
ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड से जुड़े मीडिया सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन पहले की तुलना में ज्यादा हिंसक हो गए हैं। जनता का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है और सरकार की कड़ी नीतियों के बावजूद सड़कों पर विरोध शांत नहीं हो रहा। इस बीच, इजरायल भी हाई अलर्ट पर है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सुरक्षा स्थिति और संभावित खतरे को लेकर बातचीत की है। सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन और सरकार की सख्ती देश में और अधिक तनाव पैदा कर सकती है। प्रदर्शनकारियों की मांगें कई स्तरों पर हैं, जिसमें नागरिक अधिकार, सरकार की जवाबदेही और आर्थिक स्थिति से जुड़ी चिंता प्रमुख हैं। सरकार की ओर से इंटरनेट बंद और सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद लोग लगातार प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं, जिससे यह आंदोलन देश के लिए सबसे बड़े संकट में बदलता दिख रहा है।