मणिपुर हिंसा : कुकी थोवाई गांव में 3 लोगों के क्षत-विक्षत मिले शव, नहीं थम रहा हिंसा का दौर

KNEWS DESK… मणिपुर में 3 मई को शुरू हुई हिंसा तमाम सुरक्षा व्यवस्था की कोशिशों के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रही है. मणिपुर में 3 मई से शुरू हुई फायरिंग और हिंसा आज 18 अगस्त को खबर लिखे जाने तक देखने को मिल रही है. हालात इस तरह से खराब हो गए हैं कि मैतेई समुदाय के लोग कुकी क्षेत्र में कदम नहीं रख सकते और कुकी समुदाय के लोग मैतेई इलाके में प्रवेश नहीं कर सकते.

दरअसल आपको बता दें कि मणिपुर के उखरूल जिले के कुकी थोवई गांव में जातीय संघर्ष का ताजा मामला आज यानी 18 अगस्त को देखने को मिला. जहां भारी गोलीबारी के बाद तीन युवकों के क्षत-विक्षत शव मिले. इस घटना से पूरे इलाके में तनाव फैल गया है. अधिकारियों ने बताया कि लिटन पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले गांव में सुबह-सुबह भारी गोलीबारी की आवाज सुनी गई. उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा आस-पास के गांवों और वन क्षेत्रों में गहन तलाशी के बाद 24 से 35 साल की उम्र के तीन युवकों के शव मिले. अधिकारियों ने बताया कि तीनों लोगों के शरीर पर तेज चाकू से चोट के निशान हैं. उसके अंग भी काट दिए गए हैं.

जातीय हिंसा की आग में 3 मई जल रहा है मणिपुर

जानकारी के लिए बता दें कि अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए जाने के बाद 3 मई को पूर्वोत्तर राज्य में जातीय झड़पें हुईं. मैतेई की मांग पर कुकी समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. जिसके बाद दोनों समुदाय आमने-सामने आ गए. मणिपुर की लगभग 53 प्रतिशत आबादी मैतेई लोगों की है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नागा और कुकी की आदिवासी आबादी 40 फीसदी से कुछ ज्यादा है. वे पहाड़ी जिलों में रहते हैं.

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