कानपुर किडनी कांड: 25 हजार का इनामी मुदस्सर अली ने किया सरेंडर, लंबे समय से चल रहा था फरार

शिव शंकर सविता- कानपुर में अवैध किडनी प्रत्यारोपण से जुड़े चर्चित मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपियों में शामिल ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली उर्फ डॉ. अली ने आखिरकार गुरुवार को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर चल रहे इस आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। सरेंडर के बाद अदालत ने उसे 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया है। जानकारी के अनुसार, आरोपी ने एसीजेएम-6 की अदालत में पेश होकर आत्मसमर्पण किया। सुनवाई के दौरान विवेचक द्वारा अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट में साफ तौर पर बताया गया कि मुदस्सर अली इस मामले में वांछित आरोपी है और उसकी गिरफ्तारी लंबे समय से लंबित थी। रिपोर्ट पर विचार करने के बाद अदालत ने तत्काल प्रभाव से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय लिया।

किडनी प्रत्यारोपण के ऑपरेशन में रहा है शामिल

आरोपी के अधिवक्ता मोहित द्विवेदी ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल का नाम प्रारंभिक प्राथमिकी में शामिल नहीं था और बाद में जांच के दौरान उसे इस मामले में जोड़ा गया। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में पहले भी अदालत में आख्या प्रस्तुत की जा चुकी है। हालांकि, विवेचक मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत ताजा रिपोर्ट में आरोपी की भूमिका स्पष्ट होने के बाद अदालत ने सख्त रुख अपनाया। पुलिस जांच में सामने आया है कि मुदस्सर अली, जो पेशे से एक ओटी टेक्नीशियन था, अवैध रूप से किडनी प्रत्यारोपण जैसे जटिल और संवेदनशील ऑपरेशनों में शामिल रहा है। आरोप है कि उसने कानपुर और आसपास के इलाकों में 30 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए। यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें कई अन्य लोग भी शामिल हैं।

गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में दी गई थी दबिश

पुलिस पिछले कई महीनों से आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए नोएडा, गाजियाबाद और उत्तराखंड समेत कई स्थानों पर लगातार दबिश दी गई, लेकिन वह हर बार पुलिस को चकमा देकर फरार होता रहा। अंततः बढ़ते दबाव के बीच उसने अदालत में सरेंडर करना ही बेहतर समझा। इस मामले में अब तक पुलिस 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और कई अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। अधिकारियों का मानना है कि मुदस्सर अली से पूछताछ के बाद इस अवैध अंग प्रत्यारोपण गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। साथ ही, इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान भी सामने आने की उम्मीद है।

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