K News desktop- ईरान में जारी युद्ध का असर अब भारत तक महसूस किया जा रहा है। खासकर एलपीजी सप्लाई को लेकर देश के कई हिस्सों में चिंता का माहौल बन गया है। बाजारों में एलपीजी सिलेंडर की कमी की अफवाहों के कारण लोगों में घबराहट बढ़ी है और कई जगहों पर गैस की कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही हैं। आम लोगों को डर है कि अगर सप्लाई प्रभावित हुई तो रोजमर्रा के खाने-पीने और घरेलू जरूरतों पर असर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और सप्लाई को सुचारू बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
इसी बीच भारत सरकार ने एलपीजी शिपमेंट की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर तेज़ी से पहल की है। इस सिलसिले में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच बातचीत का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारत के लिए जा रहे एलपीजी टैंकर सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सकें और ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर न पड़े।
सूत्रों के अनुसार इस समय आठ एलपीजी टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से ठीक पहले खड़े हैं। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की ढुलाई होती है। ईरान में चल रहे युद्ध के कारण इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है और इसी वजह से कई ऊर्जा शिपमेंट अस्थायी रूप से रुके हुए हैं। हालांकि भारत के साथ बातचीत के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इन टैंकरों को जल्द ही होर्मुज पार करने की अनुमति मिल जाएगी और वे भारत की ओर रवाना हो सकेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि भारत लगातार ईरान के संपर्क में है और हालात पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। सरकार की कोशिश है कि एलपीजी की सप्लाई चेन में किसी तरह की बाधा न आए और देश के उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े। माना जा रहा है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो ये आठों टैंकर जल्द ही होर्मुज पार कर भारत पहुंच जाएंगे, जिससे एलपीजी सप्लाई को लेकर बनी चिंता काफी हद तक कम हो सकती है।
बताया जा रहा है कि युद्ध की स्थिति के कारण ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई जहाजों की आवाजाही पर सख्ती बढ़ा दी है, लेकिन भारत के लिए कुछ राहत दी गई है। इसी कूटनीतिक पहल का नतीजा है कि एलपीजी टैंकरों की आवाजाही को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक मानवीय पहलू भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक करीब 250 ईरानी नाविक इस समय भारत में मौजूद हैं और अपने घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय अधिकारियों ने उन्हें रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई है और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए भी कोशिशें जारी हैं। ईरानी अधिकारियों की भी इसमें दिलचस्पी है और दोनों देश इस मुद्दे पर भी समन्वय बना रहे हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट का असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। ऐसे में भारत सरकार की कोशिश है कि कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर सक्रिय रहकर देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखा जाए। फिलहाल सरकार का कहना है कि एलपीजी की सप्लाई को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है और आने वाले दिनों में टैंकरों के पहुंचने के बाद स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।