सीजफायर टूटा तो बढ़ेगा संकट, 70% सैन्य ताकत के साथ ईरान तैयार, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती

डिजिटल डेस्क- मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सीजफायर की अवधि खत्म होने के करीब है, लेकिन शांति वार्ता अब भी अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि हालात किसी भी वक्त बिगड़ सकते हैं, जिसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस होगा। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, हालिया सैन्य कार्रवाई के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के पास अब भी करीब 40 प्रतिशत ड्रोन स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा उसके 60 प्रतिशत से अधिक मिसाइल लॉन्चर सुरक्षित हैं, जो मलबे से हथियारों की रिकवरी के बाद 70 प्रतिशत तक पहुंच सकते हैं। यह स्थिति संकेत देती है कि ईरान अभी भी जवाबी कार्रवाई करने की स्थिति में है।

Shahed-136 जैसे ताकतशाली ड्रोन बदल सकते हैं तनाव की सूरत

खासतौर पर Shahed-136 जैसे ड्रोन ईरान की रणनीतिक ताकत बनकर उभरे हैं। कम लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता के कारण ये ड्रोन समुद्री और आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने में बेहद प्रभावी माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन ड्रोन का इस्तेमाल कर ईरान बिना सीधे युद्ध के भी बड़े स्तर पर दबाव बना सकता है। इस पूरे संकट का सबसे अहम केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। अगर यहां शिपिंग बाधित होती है, तो इसका असर सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा कीमतों पर पड़ेगा। इतिहास गवाह है कि ईरान पहले भी इराक युद्ध के दौरान इस मार्ग को बाधित करने की कोशिश कर चुका है, लेकिन अब उसके पास ज्यादा उन्नत तकनीक और हथियार हैं।

होर्मुज पर स्थिति बिगड़ते ही आसमान

इस तनाव का सीधा असर अमेरिकी राजनीति पर भी पड़ सकता है, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के लिए। यदि होर्मुज में स्थिति बिगड़ती है, तो तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिससे अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी और आम जनता पर बोझ पड़ेगा। यह राजनीतिक रूप से ट्रंप के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है। दूसरी बड़ी चिंता युद्ध के फैलने की है। अभी तक अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई सीमित रही है, लेकिन अगर ईरान समुद्री मार्गों को निशाना बनाता है, तो अमेरिका पर बड़े पैमाने पर सैन्य हस्तक्षेप का दबाव बढ़ सकता है। इससे एक सीमित संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।

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