विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया, ईरान ने भारतीय जहाजों को दी अनुमति, कोई ब्लैंकेट डील नहीं

KNEWS DESK- ईरान ने युद्ध और तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी कर दी थी, जिससे वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई और कई देशों में संकट उत्पन्न हुआ। हालांकि, भारत ने कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान ढूंढ लिया है और ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को स्ट्रेट पार करने की अनुमति दी है।

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने रविवार को स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच कोई ‘व्यापक या ब्लैंकेट समझौता’ नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हर जहाज की आवाजाही के लिए अलग-अलग बातचीत की जाती है और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।

जयशंकर ने कहा, “हमारी बातचीत का नतीजा यह रहा कि शनिवार को इस स्ट्रेट से भारत का झंडा लगे दो गैस टैंकर सुरक्षित गुजरे। यह दिखाता है कि कूटनीति से क्या हासिल किया जा सकता है। अभी भी कई भारतीय जहाज वहां मौजूद हैं, इसलिए बातचीत जारी है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी जहाज की आवाजाही के बदले में ईरान को भारत से कोई लाभ नहीं मिला है और यह किसी तरह के ‘exchange’ या लेन-देन से जुड़ा मामला नहीं है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत और ईरान ने दो भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने देने के लिए विशेष समझौता किया है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव ने भी इस तरह के सवाल उठाए। लेकिन जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हर जहाज की आवाजाही की अनुमति अलग-अलग बातचीत पर निर्भर करती है और कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बनी है।

भारतीय जहाजों की स्थिति

शनिवार को दो एलपीजी टैंकर शिवालिक और नंदा देवी होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं।

शिवालिक अब कच्छ की खाड़ी में पहुंच गया है और मुंद्रा बंदरगाह पर लंगर डालने के लिए तैयार है।

आज क्रूड ऑयल टैंकर जाग लाडकी फुजैरा से रवाना हुआ है और भारत की तरफ बढ़ रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह एक स्वागत योग्य स्थिति है, लेकिन इस दिशा में बातचीत और प्रयास लगातार जारी रहेंगे ताकि सभी भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से गुजर सकें।

इससे स्पष्ट है कि भारत ने कूटनीति के माध्यम से अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की है, जबकि ईरान के साथ किसी व्यापक समझौते की अटकलें निराधार हैं।

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