BRICS चीफ जस्टिस फोरम के दूसरे दिन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक विवादों के समाधान में मध्यस्थता की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच न्याय व्यवस्था का समयबद्ध और प्रभावी होना बेहद जरूरी है.
knews Desk- दिल्ली में आयोजित BRICS चीफ जस्टिस फोरम के दूसरे दिन CJI सूर्य कांत ने सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य अलग-अलग कानूनी परंपराओं और विचारों के बीच संवाद बढ़ाकर ऐसे समाधान तलाशना है, जो व्यापक स्तर पर मानवता और साझा विकास के लिए उपयोगी हों.
जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि भारत की तरह BRICS फोरम भी खुले विचारों, संवाद और आपसी समझ की भावना को बढ़ावा देता है. उन्होंने स्वस्थ असहमति को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी विचार को तर्क और चर्चा के जरिए परखा जाना चाहिए.
CJI सूर्य कांत ने ‘ग्लोबलाइज्ड इकोनॉमी में अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल विवादों को सुलझाने के लिए एक रणनीतिक तरीके के तौर पर मध्यस्थता’ विषय पर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि जब दुनिया में व्यापार तेजी से विस्तार कर रहा है, तो विवादों के निपटारे के लिए न्याय व्यवस्था को भी उतनी ही तेजी और दक्षता के साथ काम करना होगा.
उन्होंने कहा कि BRICS देशों की पारंपरिक व्यवस्थाओं में बातचीत और समझौते के जरिए विवाद सुलझाने की परंपरा लंबे समय से मौजूद रही है. भारत की पंचायत व्यवस्था से लेकर चीन की संवाद आधारित परंपराओं और ब्राजील, रूस तथा दक्षिण अफ्रीका में सुलह की व्यवस्थाओं तक, सभी में आपसी सहमति को महत्व दिया गया है.
CJI ने समझाया मध्यस्थता का महत्व
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता इसी सोच पर आधारित एक व्यावहारिक प्रक्रिया है. इसमें विवाद में शामिल पक्ष अदालत की लंबी प्रक्रिया के बजाय बातचीत के जरिए समाधान तक पहुंच सकते हैं. इससे न केवल विवाद खत्म करने में मदद मिलती है, बल्कि कारोबारी रिश्ते और भविष्य में सहयोग की संभावनाएं भी बनी रहती हैं.
उन्होंने BRICS देशों से मध्यस्थता की व्यवस्था को और मजबूत करने का आह्वान किया. CJI ने कहा कि न्यायपालिका और कानूनी संस्थाएं आपस में सहयोग बढ़ाकर ऐसी व्यवस्था तैयार कर सकती हैं, जिस पर कारोबारी भरोसा कर सकें.
उन्होंने कहा कि ऐसे मध्यस्थों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिन्हें कानूनी पहलुओं के साथ-साथ अलग-अलग देशों की व्यापारिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की भी समझ हो. इससे अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान आसान हो सकता है और कारोबार में रुकावट कम होगी.
CJI सूर्य कांत ने न्याय व्यवस्था में समयबद्धता और निश्चितता को बेहद अहम बताया. उन्होंने कहा कि लोगों और कारोबारियों के लिए यह जानना जरूरी है कि उन्हें न्याय कब और किस तरह मिलेगा. तेज और भरोसेमंद न्याय व्यवस्था आर्थिक गतिविधियों और आपसी विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
नालंदा विश्वविद्यालय का किया जिक्र
अपने संबोधन में CJI ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए स्वस्थ बहस और असहमति की संस्कृति की चर्चा की. उन्होंने कहा कि नालंदा दुनिया के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल था, जहां अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले छात्रों और विद्वानों का स्वागत किया जाता था.
उन्होंने कहा कि नालंदा की विशेषता यह थी कि वहां प्रवेश से पहले विद्वानों से किसी एक विचारधारा, कानून या दर्शन को स्वीकार करने की शर्त नहीं रखी जाती थी. वहां अलग-अलग विचारों पर चर्चा और असहमति के लिए खुला माहौल था.
CJI सूर्य कांत ने कहा कि BRICS फोरम को भी इसी तरह के जीवंत मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां अलग-अलग विचारों के बीच संवाद हो और आपसी समझ के जरिए साझा लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ा जा सके.