विशेष संसद सत्र से पहले BJP का सख्त व्हिप, 3 दिन सभी सांसदों की अनिवार्य मौजूदगी, महिला आरक्षण पर टकराव तेज

डिजिटल डेस्क- आगामी विशेष संसद सत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सभी सांसदों के लिए सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं। पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी करते हुए 16 से 18 अप्रैल तक सदन में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि इन तीन दिनों के दौरान किसी भी सांसद या केंद्रीय मंत्री को छुट्टी नहीं दी जाएगी। भाजपा की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी सदस्य सदन में लगातार मौजूद रहें और कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार इस विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है। पार्टी के निर्देश के मुताबिक, सभी सांसदों को तीनों दिन सदन में उपस्थित रहना होगा और व्हिप का कड़ाई से पालन करना होगा। पार्टी नेतृत्व ने इसे अत्यंत महत्वपूर्ण सत्र बताते हुए किसी भी तरह की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेने की बात कही है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस सत्र को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी तरह की राजनीतिक ढिलाई नहीं चाहती।

डेरेक ओ ब्रायन ने बोला केंद्र सरकार पर तीखा हमला

इस बीच, इस विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद को गंभीरता से लेने के बजाय इसे राजनीतिक मंच बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले इस तरह के कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। वहीं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर पहले चर्चा करने की जरूरत बताई है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने पत्र में ये भी आरोप लगाएं

खरगे ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि विशेष संसद सत्र बिना विपक्ष को विश्वास में लिए बुलाया गया है, जिससे सार्थक चर्चा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सभी जरूरी बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं होगी, तब तक इस सत्र का उद्देश्य अधूरा रह सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण विधेयक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर जहां एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक कदम के रूप में पेश करना चाहती है, वहीं विपक्ष इसे लेकर पारदर्शिता और व्यापक चर्चा की मांग कर रहा है। ऐसे में यह सत्र केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सियासी टकराव का केंद्र भी बन सकता है।

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