जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्र 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर प्रदर्शन को जबरन खत्म कराने, प्रताड़ित करने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। छात्रों की मांग है कि छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाएं, उनके खिलाफ हुई कार्रवाई वापस ली जाए और सिक्योरिटी एडवाइजर व प्रॉक्टर को हटाया जाए।
Knews Desk – जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। भूख हड़ताल के 14वें दिन छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर प्रताड़ना और आंदोलन को जबरन खत्म कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन प्रशासन उनके प्रदर्शन को बाधित करने की कोशिश कर रहा है।
मीडिया से बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि उनके पांच साथी भूख हड़ताल पर बैठे हैं और छात्र संघ की बहाली की मांग कर रहे हैं। छात्रों के मुताबिक, शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, जिसके बाद उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की। उनका आरोप है कि छात्र संघ की बहाली की मांग को विश्वविद्यालय प्रशासन ने खारिज कर दिया।
छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया गया और उनके साथ मारपीट करने के साथ घसीटने जैसी घटनाएं हुईं। इसके बावजूद वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे रख रहे हैं। छात्रों का यह भी आरोप है कि कुलपति ने सभी फैकल्टी को बुलाया और छात्रों के साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
12 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं छात्र
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, वे 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि विश्वविद्यालय में पिछले करीब 20 वर्षों से नहीं हुए छात्र संघ चुनावों को फिर से शुरू कराया जाए। छात्रों ने कहा कि वे लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन कई बार उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर चुका है।
छात्रों ने बताया कि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ बातचीत भी हुई थी। हालांकि, कुलपति की ओर से गठित कमेटी को लेकर सहमति नहीं बन सकी। छात्रों के मुताबिक, रजिस्ट्रार, एडमिन ब्लॉक के अधिकारी और प्रोफेसर भी बातचीत के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान प्रॉक्टर की ओर से उनका एक टेंट हटाकर फेंक दिया गया, जिससे प्रदर्शनकारी छात्रों में नाराजगी बढ़ गई।
छात्रों का आरोप है कि उन्होंने टेंट को बचाने और प्रदर्शन स्थल पर अपना धरना जारी रखने की कोशिश की। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से लगातार उनके प्रदर्शन को बाधित किया जा रहा है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि 14वें दिन भी उन्हें हटाने की कोशिश की गई और बातचीत के दौरान एक व्यक्ति ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया।
छात्रों की क्या हैं तीन प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाएं। दूसरी मांग है कि छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस ली जाए। तीसरी मांग है कि विश्वविद्यालय के सिक्योरिटी एडवाइजर और प्रॉक्टर को उनके कथित दुर्व्यवहार के चलते पद से हटाया जाए।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उनकी मांगों पर किस तारीख को सुनवाई होगी और छात्र संघ चुनाव कराने की प्रक्रिया कब शुरू की जाएगी। वे चाहते हैं कि प्रशासन चुनाव बहाली के लिए निश्चित तारीख घोषित करे।
फिलहाल, छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत के बावजूद अब तक उनकी मांगों पर सहमति बनने की जानकारी सामने नहीं आई है।