दिवाली पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन घरों में दीप जलाकर मां लक्ष्मी और गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली की पूजा में इन दोनों देवताओं की आराधना एक साथ क्यों की जाती है? इसके पीछे धन और बुद्धि के बीच संतुलन से जुड़ी महत्वपूर्ण मान्यता बताई जाती है।
KNEWS DESK- इस साल दीपावली का पर्व 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए दिवाली की पूजा में दोनों की साथ में आराधना को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि जीवन में धन के साथ सही बुद्धि और विवेक होना भी जरूरी है।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:54 बजे से शाम 07:50 बजे तक रहेगा। पूजा की कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट बताई गई है। वहीं प्रदोष काल शाम 05:31 बजे से रात 08:09 बजे तक रहेगा।
लक्ष्मी और गणेश जी की साथ में पूजा का क्या है कारण?
दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की एक साथ पूजा करने के पीछे शुभ-लाभ और बुद्धि के संतुलन की मान्यता है। मां लक्ष्मी धन और भौतिक समृद्धि का प्रतीक हैं, वहीं गणेश जी बुद्धि, विवेक और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। माना जाता है कि जीवन में धन के साथ विवेक का होना भी बेहद आवश्यक है।Mयदि व्यक्ति के पास धन तो हो, लेकिन उसका सही इस्तेमाल करने की समझ न हो, तो समृद्धि उसके लिए परेशानी का कारण भी बन सकती है। इसी वजह से दिवाली की पूजा में मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की आराधना की जाती है। मान्यता है कि इससे व्यक्ति को धन के साथ सद्बुद्धि भी प्राप्त होती है और वह अपने जीवन में सही निर्णय ले पाता है।
बिना बुद्धि के धन क्यों बन सकता है परेशानी का कारण?
धार्मिक मान्यताओं में बताया गया है कि केवल धन प्राप्त होना ही पर्याप्त नहीं है। यदि व्यक्ति के पास उस धन का सही इस्तेमाल करने की बुद्धि और विवेक नहीं है, तो वह गलत फैसले ले सकता है। धन के साथ अहंकार आने पर व्यक्ति अपने लिए और दूसरों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। इसी कारण भगवान गणेश की पूजा को मां लक्ष्मी की पूजा के साथ जोड़ा गया है। गणेश जी को बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता मिलती है और वह धन का उपयोग उचित तरीके से कर पाता है।
सद्बुद्धि से होता है धन का सही इस्तेमाल
धन प्राप्त करने के साथ उसका संरक्षण और सही उपयोग करना भी जरूरी है। व्यक्ति को अपने धन का इस्तेमाल परिवार की जरूरतों, भविष्य की योजनाओं और अच्छे कार्यों के लिए करना चाहिए। इसके लिए समझदारी और विवेक की आवश्यकता होती है।
मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करते हैं, जबकि मां लक्ष्मी धन और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। यही वजह है कि दिवाली की पूजा में दोनों की एक साथ आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धन और बुद्धि का यह संतुलन जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक होता है।