अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच और CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी मिलने के बाद अदालत ने अब मामले में निगरानी बंद कर दी है।
Knews Desk– मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई करे। हालांकि, जनहित को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को आपराधिक कार्यवाही के दौरान मजिस्ट्रेट की सहायता करने की अनुमति दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले में लगाए गए आरोपों की सच्चाई या उनके गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। अब आगे का फैसला चार्जशीट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा। दरअसल, राम मंदिर में दान की नकदी की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने CBI जांच, स्वतंत्र जांच एजेंसी के गठन और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान CCTV फुटेज के आधार पर दान की नकदी को कथित तौर पर बिना अनुमति निकालने की 105 घटनाओं का जिक्र किया गया था। जांच में आठ आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात भी कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले उत्तर प्रदेश सरकार की SIT से जांच की प्रगति पर रिपोर्ट मांगी थी। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला मजिस्ट्रेट अदालत में आगे बढ़ेगा। आरोपियों की जिम्मेदारी और आरोपों की पुष्टि का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।