टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में आरोपियों के फरार होने की योजना से जुड़े कई खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, तीनों शूटरों ने दिल्ली के रास्ते नेपाल भागने की योजना बनाई थी, लेकिन बस छूटने के बाद उन्हें अपना प्लान बदलना पड़ा।
Knews Desk – बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस बीच आरोपियों के फरार होने की कोशिश और उनकी कथित साजिश से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के मुताबिक, फायरिंग के बाद तीनों शूटरों ने पुलिस से बचने और देश छोड़कर भागने के लिए कई स्तरों पर योजना बनाई थी। उनका पहला प्लान सूरत से बस के जरिए दिल्ली पहुंचना और फिर नेपाल की सीमा पार करना था, लेकिन सूरत बस स्टैंड पहुंचने तक दिल्ली जाने वाली बस निकल चुकी थी। इसके बाद आरोपियों ने अपनी रणनीति बदलते हुए ट्रेन से राजस्थान के रास्ते दिल्ली पहुंचने की तैयारी की।
मुंबई क्राइम ब्रांच से मिले इनपुट के आधार पर राजस्थान पुलिस ने तीनों आरोपियों को जयपुर पहुंचने से पहले कोटा रेलवे स्टेशन पर पुणे-जयपुर एक्सप्रेस से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की योजना जयपुर में उतरकर बस या टैक्सी से दिल्ली पहुंचने और वहां से नेपाल भागने की थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी लगातार अपने सफर का तरीका बदल रहे थे, ताकि पुलिस को चकमा दिया जा सके।
बस छूटी तो मास्टरमाइंड ने बनाया प्लान-B
जांच के मुताबिक, सूरत पहुंचने के बाद तीनों आरोपियों ने दिल्ली जाने वाली बस पकड़ने की कोशिश की, लेकिन बस निकल जाने के कारण उनकी योजना नाकाम हो गई। इसके बाद कथित मास्टरमाइंड अनिल पंडित ने प्लान-B सक्रिय किया। आरोप है कि अनिल पंडित ने आरोपी अंकित खटक के जरिए VoIP कॉल पर तीनों शूटरों को आगे की रणनीति के बारे में निर्देश दिए। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि भागने की योजना बनाने में किन लोगों की भूमिका थी और आरोपियों को निर्देश कहां से मिल रहे थे।
रात करीब 1:33 बजे पकड़ी पुणे-जयपुर एक्सप्रेस
पुलिस जांच के अनुसार, तीनों आरोपी फूल सिंह, रेहान अंसारी और ऋतिक कुमार टैक्सी से सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचे। इसके बाद उन्होंने रात करीब 1:30 से 1:33 बजे के बीच पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस पकड़ी। सूरत रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों को ट्रेन के जनरल कोच में चढ़ने के लिए भागते हुए देखा गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की गतिविधियों और ट्रेन में उनकी मौजूदगी का पता सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के जरिए लगाया गया।
मुंबई क्राइम ब्रांच ने ट्रेन और कोच से जुड़ी जानकारी राजस्थान पुलिस के साथ साझा की। इसके बाद कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ाई और ट्रेन के कोटा पहुंचने पर तीनों आरोपियों को पकड़ लिया।
पुलिस चेकिंग के डर से हथियार छिपाने का दावा
जांच से जुड़े इनपुट के मुताबिक, आरोपियों को डर था कि ट्रेन में पुलिस की तलाशी के दौरान उनके पास से हथियार बरामद हो सकते हैं। इसी आशंका के चलते उन्होंने फायरिंग में इस्तेमाल की गई दो बंदूकें और कारतूस सूरत बस स्टैंड के पास एक खुले स्थान पर छिपा दिए थे। हालांकि, कोटा में गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास से हथियार बरामद नहीं हुए थे। पुलिस हथियारों की बरामदगी, उन्हें आरोपियों तक पहुंचाने वाले लोगों और उनके पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
गिरफ्तारी के वक्त मिले 5,000 रुपये
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी के समय तीनों आरोपियों के पास 5,000 रुपये मिले थे। पुलिस को संदेह है कि यह रकम दिल्ली तक पहुंचने और उसके बाद नेपाल भागने के यात्रा खर्च के लिए रखी गई थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के भागने का खर्च किसने उठाया, उन्हें कितनी रकम देने का वादा किया गया था और कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों ने किस तरह उनकी मदद की।
मुंबई से सूरत तक ऐसे पहुंचे थे आरोपी
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में आरोपियों के भागने के रास्ते की कई अहम कड़ियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग के बाद तीनों कथित आरोपी मोटरसाइकिल से फरार हुए और अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां से लोकल ट्रेन के जरिए वे मुंबई के पश्चिमी उपनगरों की ओर गए। इसके बाद उन्होंने टैक्सी कैब से सूरत तक का सफर किया और वहां से पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में सवार हो गए।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कैब से जुड़े सुराग और अलग-अलग राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय के जरिए उनकी गतिविधियों का पता लगाया। मुंबई, गुजरात और राजस्थान पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत आरोपियों को कोटा में गिरफ्तार किया गया।
अनिल पंडित और अन्य संपर्कों की जांच
इस मामले में पुलिस अनिल पंडित की कथित भूमिका और आरोपियों के साथ उसके संपर्कों की भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में आरोपियों को पैसे देने और विदेश में बसने का लालच दिए जाने की बात सामने आई थी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग की साजिश किसने तैयार की, हथियारों की व्यवस्था किसने की और टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने के पीछे क्या मकसद था।
फिलहाल, आरोपियों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और हथियारों की बरामदगी से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।