सद्गुरु के ईशा आउटरीच की बड़ी उपलब्धि, 3 किसान संगठनों को मिला CII अवॉर्ड

सद्गुरु के ईशा आउटरीच के सहयोग से संचालित तीन किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित CII FPO Excellence Awards में सम्मानित किया गया है। इन संगठनों को किसानों की आजीविका मजबूत बनाने, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और बाजार की जरूरतों के अनुरूप कृषि उद्यम विकसित करने के प्रयासों के लिए पुरस्कार मिले हैं।

Knews Desk – ईशा आउटरीच द्वारा समर्थित FPOs को लगातार चौथे साल राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कारों के जरिए पहचान मिली है। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित थेनचेरीमलाई फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने मार्केट लिंकेज कैटेगरी में विजेता का पुरस्कार हासिल किया। वहीं, कर्नाटक के कोडागु स्थित पोन्नाड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी कैटेगरी में विजेता बनी। इसके अलावा, कोयंबटूर के सेनियांदावर FPO को मार्केट लिंकेज कैटेगरी में विशेष पहचान मिली।

इन पुरस्कारों के लिए देशभर से हजारों FPO आवेदकों को शामिल किया गया था। चयन प्रक्रिया में तीन स्तरों पर मूल्यांकन किया गया। ये सम्मान किसान-नेतृत्व वाले संगठनों की बाजार तक पहुंच मजबूत करने, प्रभावी व्यावसायिक प्रक्रियाएं अपनाने और टिकाऊ खेती के तरीकों को आगे बढ़ाने के प्रयासों को मान्यता देते हैं।

सेनियांदावर फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के सेल्वराज ने पुरस्कार पर बात करते हुए बताया कि उनकी कंपनी ईशा के साथ मिलकर काम कर रही है और इसमें 750 किसान सदस्य हैं। कंपनी लगभग 240 किसानों से नारियल खरीदती है और उन्हें दूसरे खरीदारों की तुलना में प्रति नारियल या प्रति किलोग्राम 3 से 4 रुपये अधिक देती है। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।

सेल्वराज ने कहा कि ईशा के समर्थन से उन्हें दूसरे राज्यों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यावसायिक संबंध बनाने का भरोसा मिला है। इससे वे अपने कृषि उत्पादों की बिक्री बढ़ा सकेंगे।

ईशा आउटरीच का सेव सॉइल फार्मर्स मूवमेंट (SSFM) छोटे और सीमांत किसानों को FPOs के माध्यम से एकजुट करता है। इसका उद्देश्य किसान-स्वामित्व वाले लाभकारी व्यवसाय विकसित करने के लिए उन्हें तकनीकी, वित्तीय और मार्केटिंग सहायता उपलब्ध कराना है। किसानों को सामूहिक रूप से काम करने में मदद देकर यह पहल उनकी मोलभाव करने की क्षमता मजबूत करने, बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने और आर्थिक रूप से लाभकारी व टिकाऊ कृषि व्यवसायों के विकास को प्रोत्साहित करती है।

यह पहल वर्ष 2013 में वेल्लियांगिरी उझावन FPO के गठन के साथ शुरू हुई थी। इसके बाद इसका विस्तार तमिलनाडु और कर्नाटक में संचालित 25 FPOs तक हो गया। इन संगठनों में कुल 17,000 से अधिक किसान सदस्य हैं। इनमें 60 प्रतिशत छोटे और अति छोटे किसान हैं, जबकि 15 प्रतिशत महिलाएं हैं।

ये किसान आठ जिलों और 580 से अधिक गांवों में 54,000 एकड़ से ज्यादा जमीन पर खेती करते हैं। यहां नारियल, कॉफी, केला और बाजरा समेत 15 तरह की फसलें उगाई जाती हैं। इन FPOs ने सामूहिक रूप से 400 करोड़ रुपये से अधिक का कुल टर्नओवर दर्ज किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *