भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) अपनी परिचालन क्षमताओं का विस्तार कर रही है। बदलते युद्ध के तौर-तरीकों को देखते हुए बल ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, आधुनिक हथियारों और विशेष प्रशिक्षण पर जोर दे रहा है। ITBP का लक्ष्य सीमा पर तैनात जवानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशिक्षण से लैस करना है।
Knews Desk – ITBP की योजना सीमा पर तैनात हर बटालियन में ड्रोन प्लाटून तैनात करने की है। इससे निगरानी, दुर्गम इलाकों की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के मुताबिक, भारत-चीन सीमा पर चुनौतियों से निपटने के लिए पारंपरिक युद्ध रणनीति के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी जरूरी है। मौजूदा दौर में केवल पारंपरिक तरीकों से हर चुनौती का सामना करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में नई तकनीक, आधुनिक हथियारों और ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से समझी ड्रोन की ताकत
ITBP के महानिदेशक ने जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि यूक्रेन पिछले चार साल से रूस के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है और इस संघर्ष में रूस को भी भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है।
उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष का भी उल्लेख करते हुए ड्रोन की ताकत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, आधुनिक युद्ध में ड्रोन जैसी तकनीक बड़ी सैन्य ताकतों के सामने भी चुनौती खड़ी कर सकती है।
2027 के अंत तक जवानों को STRIKE ट्रेनिंग देने का लक्ष्य
ITBP ने अपने जवानों को विशेष STRIKE ट्रेनिंग देने की योजना बनाई है। लक्ष्य है कि 2027 के अंत तक पूरे बल को यह प्रशिक्षण दिया जाए। अब तक करीब 10 हजार जवान यह कोर्स पूरा कर चुके हैं, जबकि 330 मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए गए हैं।
इन मास्टर ट्रेनरों के जरिए अन्य जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे बल की परिचालन क्षमता को मजबूत करने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
आधुनिकीकरण के लिए हजारों करोड़ रुपये की योजना
ITBP ने अपने आधुनिकीकरण के लिए 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये के बड़े कार्यक्रम की योजना बनाई है। इसमें ड्रोन वॉरफेयर के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी शामिल है।
इसके अलावा, 400 करोड़ रुपये के आवंटन में से करीब 70 फीसदी राशि ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च करने की योजना बताई गई है। ड्रोन के मामले में बाहरी कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए ITBP ने अपने स्तर पर ड्रोन बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की है।
सीमा पर स्थित अग्रिम चौकियों यानी फॉरवर्ड बॉर्डर आउटपोस्ट (BOPs) को भी आधुनिक उपकरणों से मजबूत करने की योजना है। इसका उद्देश्य गलवान जैसी तनावपूर्ण परिस्थितियों में जवानों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना और उनकी परिचालन क्षमता बढ़ाना है।
ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक और विशेष प्रशिक्षण पर जोर देकर ITBP सीमा पर निगरानी तथा चुनौतीपूर्ण हालात से निपटने की अपनी क्षमता को मजबूत करना चाहती है।