किराए में देरी पर जुर्माना वसूलना पड़ा भारी, किराएदार की एक्सेल शीट से खुला मरम्मत का हिसाब

किराए के घर में रहने वाले लोगों और मकान मालिक के बीच अक्सर किराया, मरम्मत और जरूरी सुविधाओं को लेकर विवाद हो जाता है। सोशल मीडिया पर ऐसा ही एक मामला चर्चा में है, जहां एक दिन देर से किराया देने पर मकान मालिक ने किराएदार पर जुर्माना लगा दिया। इसके जवाब में किराएदार ने बहस करने के बजाय घर की लंबित मरम्मत संबंधी शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह रिकॉर्ड बिल्डिंग में रहने वाले दूसरे किराएदारों के लिए भी शिकायतें दर्ज करने का साझा माध्यम बन गया।

एक दिन की देरी पर लगाया जुर्माना

X पर Dekim_Kalvino नाम के यूजर ने इस मामले को शेयर किया। पोस्ट के मुताबिक, मकान मालिक का नियम था कि हर महीने की 5 तारीख तक किराया जमा करना जरूरी है। तय तारीख के बाद किराया देने पर जुर्माना वसूला जाता था।

इसी नियम के तहत जब एक किराएदार ने 6 तारीख को किराया जमा किया, तो मकान मालिक ने उस पर जुर्माना लगा दिया। इसके बाद किराएदार ने बहस करने के बजाय घर में लंबे समय से लंबित मरम्मत के कामों का रिकॉर्ड तैयार करना शुरू कर दिया।

स्प्रेडशीट में दर्ज कीं शिकायतें

किराएदार ने एक स्प्रेडशीट बनाई, जिसमें घर की अलग-अलग समस्याओं की शिकायत करने की तारीख दर्ज की गई। इसके साथ ही उसने संबंधित मैसेज और स्क्रीनशॉट भी संभालकर रखे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन समस्याओं को लंबे समय से ठीक नहीं किया गया था।

कुछ समय बाद किराएदार ने यह रिकॉर्ड दूसरे किराएदारों के साथ भी साझा कर दिया। इसके बाद दूसरे लोग भी अपने घरों से जुड़ी शिकायतें और उनके सबूत इस स्प्रेडशीट में जोड़ने लगे। धीरे-धीरे यह बिल्डिंग में लंबित मरम्मत संबंधी शिकायतों का साझा रिकॉर्ड बन गया।

63 दिनों से लंबित थीं मरम्मत की शिकायतें

पोस्ट के मुताबिक, अगले महीने जब मकान मालिक ने किराया जमा करने के लिए दोबारा रिमाइंडर भेजा, तो किराएदार ने उसी स्प्रेडशीट के जरिए जवाब दिया। उसने बताया कि किराया 5 तारीख तक जमा करने की उम्मीद की जाती है, जबकि मरम्मत से जुड़ी उनकी शिकायतें 63 दिनों से लंबित थीं।

इसके बाद मकान मालिक ने किराएदार को निजी तौर पर फोन किया और स्प्रेडशीट हटाने के लिए कहा। हालांकि, किराएदार ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उसका तर्क था कि अगर किराया देर से देने पर जुर्माना लगाया जा सकता है, तो मरम्मत के काम में लगातार देरी होने पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। बताया गया कि इसके बाद मकान मालिक ने फोन काट दिया।

सोशल मीडिया पर किराएदारों के अधिकारों की चर्चा

इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर किराएदारों के अधिकारों और मकान मालिकों की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

एक यूजर ने अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कुछ परिस्थितियों में किराएदार तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करके जरूरी मरम्मत करवा सकते हैं और उसका खर्च किराए से काटने का विकल्प अपना सकते हैं। हालांकि, इसके लिए लिखित सूचना देना और कानून में निर्धारित समय का इंतजार करना जरूरी हो सकता है।

एक अन्य यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए दावा किया कि उसने भी अपने पूर्व मकान मालिक के खिलाफ सबूतों के साथ शिकायत की थी। उसका आरोप था कि किराए में कानूनी सीमा से अधिक बढ़ोतरी की गई थी। यूजर के मुताबिक, शिकायत के बाद उसे पैसे वापस मिले और तनाव के लिए मुआवजा भी मिला।

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