उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए 12 सवाल पूछे हैं। उन्होंने बैंकों के निजीकरण, खातों से कटने वाले चार्ज, लोन, साइबर ठगी और UPI जैसी सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं।
Knews Desk – उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनावी तैयारियों के बीच सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार बीजेपी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने बैंकिंग सेक्टर से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से सवाल पूछे हैं।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बीजेपी सरकार के 12 साल के कार्यकाल को लेकर 12 सवाल उठाए। उन्होंने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ‘बारह साल, बारह सवाल’। सपा प्रमुख ने बैंकिंग व्यवस्था में आम जनता, किसानों, छात्रों, छोटे दुकानदारों और बैंक कर्मचारियों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया।
ब्याज से लेकर UPI तक, अखिलेश ने पूछे 12 सवाल
अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था को लेकर सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि अगर बैंक मजबूत हुए हैं, तो उन्हें बेचा क्यों जा रहा है। उन्होंने खातों से पैसे कटने, बार-बार KYC कराने, ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाओं और ATM बंद होने तथा किसानों और छात्रों को आसानी से लोन नहीं मिलने जैसे मुद्दे उठाए।
सपा प्रमुख के 12 सवाल इस प्रकार हैं।
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो फिर बेचे क्यों जा रहे हैं?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो गरीब जनता के खाते से पैसे क्यों काटे जा रहे हैं?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो बार-बार KYC के नाम पर जनता के पैसे देने से इनकार क्यों किया जा रहा है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो बैंकों से खरबों रुपये का लोन लेकर भागने वालों को पकड़कर देश में लाकर सजा क्यों नहीं दी जा रही है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाएं और ATM बंद करके जनता को कैश के लिए क्यों भटकाया जा रहा है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो किसानों, छात्रों और छोटे दुकानदारों को बिना बिचौलिये और बिना गारंटर के लोन क्यों नहीं मिल रहा है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों का पैसा तुरंत वापस क्यों नहीं होता और उन्हें थाने व बैंक के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो होम लोन और एजुकेशन लोन पर ब्याज इतना ज्यादा क्यों है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो डिजिटल ट्रांजेक्शन फेल होने पर जनता का पैसा कई-कई दिन तक होल्ड पर क्यों रखा जाता है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो CIBIL स्कोर में छोटी-सी चूक पर युवाओं को डिफॉल्टर बताकर उनका भविष्य क्यों खराब किया जा रहा है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो बुजुर्गों और अनपढ़ लोगों को UPI और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाने के लिए हर बैंक शाखा में सहायता काउंटर क्यों नहीं है?
♦ बैंक मजबूत हुए हैं तो बैंक कर्मचारियों की जायज मांगें क्यों नहीं मानी जा रहीं, नई भर्तियां क्यों नहीं हो रहीं और मौजूदा कर्मचारियों पर इतना दबाव क्यों है कि ग्राहक सेवा प्रभावित हो रही है?
पहले भी बैंकिंग व्यवस्था पर उठा चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है, जब अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। इससे पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कई सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी ने बैंकिंग व्यवस्था को सूदखोरी से भी ज्यादा खराब बना दिया है।
अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी सरकार 2014 से बैंकिंग सुधारों की बात कर रही है, लेकिन पिछले 12 वर्षों में बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई हैं। उन्होंने सरकार से इन मुद्दों पर जवाब देने की मांग की थी।
‘आपका खाता, देता घाटा’, अखिलेश का तंज
अखिलेश यादव ने अपनी पिछली पोस्ट में बैंक खातों से जुड़ी विभिन्न कटौतियों, ATM और SMS चार्ज, कम ब्याज दरों, KYC की परेशानियों, डिजिटल बैंकिंग में होने वाली धोखाधड़ी और लोन देने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।
उन्होंने बैंक लॉकर की सुरक्षा, ग्राहकों से वसूले जाने वाले शुल्क, बैंक कर्मचारियों की कार्यस्थितियों और नई भर्तियों जैसे मुद्दों को भी उठाया था। साथ ही जन-धन खातों में पेनल्टी और चार्ज काटे जाने को लेकर गरीबों के हितों का सवाल उठाया था।
सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा था कि ‘आपका खाता, भाग्यविधाता’ का नारा देने वालों को अब जनता को सच बताना चाहिए। उन्होंने इसे ‘आपका खाता, देता घाटा’ कहते हुए बीजेपी सरकार से बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब मांगे थे।