Dussehra 2026: दशहरे के दिन भूलकर भी न करें ये 5 काम, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अशुभ माने जाते हैं

KNEWS DESK- दशहरा यानी विजयादशमी का त्योहार 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत का उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन कुछ कार्यों से परहेज करना चाहिए। आइए जानते हैं कि विजयादशमी पर किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

दशहरा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। वहीं, माता दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद महिषासुर का संहार किया था।

दशहरे के अवसर पर देशभर में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। कई स्थानों पर रामलीला का आयोजन होता है, जबकि कुछ जगहों पर शस्त्र पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। इस दिन लोग सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, इस दिन कुछ काम करने से बचने की सलाह दी जाती है।

तामसिक भोजन करने से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। ऐसे में मांस, मछली, अंडा और शराब जैसी चीजों से परहेज करने की परंपरा है। कुछ मान्यताओं में प्याज और लहसुन को भी तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा जाता है।

पशु-पक्षियों और प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं

दशहरे के दिन किसी भी जीव-जंतु को नुकसान पहुंचाने या प्रताड़ित करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही पेड़-पौधों और प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। धार्मिक परंपराओं में जीवों के प्रति दया और करुणा को महत्वपूर्ण माना गया है।

किसी का अपमान करने और विवाद से बचें

विजयादशमी को शुभ और मंगलकारी अवसर माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किसी महिला, बुजुर्ग या अन्य व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। वाद-विवाद, लड़ाई-झगड़े और कटु वचन बोलने से बचते हुए घर में शांति और सद्भाव बनाए रखना चाहिए।

कुछ वस्तुओं का दान करने से बचने की है मान्यता

कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन हल्दी, चमड़े से बनी वस्तुएं और फटे-पुराने कपड़ों का दान करने से परहेज करना चाहिए। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।

शाम के समय इन चीजों को देने से बचें

कुछ प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, दशहरे की शाम किसी दूसरे व्यक्ति को सुई, नमक या चीनी देने से बचना चाहिए। इसे पारंपरिक मान्यता के रूप में देखा जाता है। इसका कोई सर्वमान्य धार्मिक नियम नहीं है।

दशहरे के दिन पूजा-पाठ के साथ अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और हथियारों की साफ-सफाई करके उनका पूजन करने की भी परंपरा है। कुछ लोग अपने वाहनों की पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि विजयादशमी पर शुभ कार्यों की शुरुआत करना मंगलकारी होता है। ध्यान रखें कि इन मान्यताओं का पालन अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में प्रचलित परंपराओं के अनुसार किया जाता है। इनका उद्देश्य त्योहार के अवसर पर संयम, सद्भाव और सकारात्मकता को बढ़ावा देना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *