उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की सियासत में राज्यपालों की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राष्ट्रपति की ओर से पांच राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड के पूर्व प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने को लेकर देवभूमि से दिल्ली तक हो रही है। दरअसल, विपक्ष इस नियुक्ति को बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ रहा है। अंकिता केस में कथित वीआईपी के तौर पर दुष्यंत गौतम का नाम सामने आने के बाद से ही प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी जारी है, हालांकि दुष्यंत गौतम और सत्ता पक्ष इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। आपको बता दें कि बीते दिनों पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली उर्मिला सनावर के सोशल मीडिया पर वीडियो और कथित ऑडियो जारी करने के बाद VIP एंगल पर सवाल तेज हुए थे। इसके बाद CBI जांच की मांग उठी और मुख्यमंत्री ने अंकिता के माता-पिता और जनभावना को देखते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी, जिसके बाद जांच अभी भी जारी है। लेकिन दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाये जाने के विषय के बाद एक बार फिर इस विषय पर चर्चा तेज़ हो गई है। इसी बीच बीती रात अंकिता भंडारी के माता-पिता न्याय की गुहार लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए। मांग है कि CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। इस धरने में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर समर्थन किया। जिसके बाद बुधवार देर रात तक चला धरना गुरुवार तड़के करीब चार बजे दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद खत्म हुआ। पुलिस ने अंकिता के माता-पिता समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। लेकिन राज्य से उठा यह विषय अब केंद्र तक पहुंच चुका है, और विपक्ष लगातार हमलावर है। इस बीच आरोप प्रत्यारोप भी नज़र आने लगा है।
राष्ट्रपति ने पांच राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए हैं, लेकिन उत्तराखंड में चर्चा भाजपा के पूर्व प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के नाम पर हो रही है। यही कारण है कि सिक्किम के नए राज्यपाल की नियुक्ति ने उत्तराखंड की सियासत में भूचाल ला दिया है। दरअसल विपक्ष दुष्यंत गौतम के नाम को अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित VIP से जोड़ रहा है। इस हत्याकांड में लंबे समय से VIP की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि खुद दुष्यंत गौतम इन आरोपों को बेबुनियाद बता चुके हैं।कुछ महीनों पहले उर्मिला सनावर द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करने के बाद मामला फिर गरमा गया था। मांग उठी CBI जांच की जिसके बाद माता पिता व जनभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने CBI जांच के संस्तुति दी, और जांच अभी भी जारी है। लेकिन अब गौतम की राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति के बाद देर रात अंकिता के माता पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने CBI जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकने की मांग की। धरने को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने समर्थन दिया। गुरुवार तड़के चार बजे पुलिस ने धरना खत्म कराकर माता पिता सहित सभी को हिरासत में लिया और बाद में रिहा कर दिया। लेकिन इन सबके चलते देवभूमि से लेकर दिल्ली सियासत तक उक्त विषय पर चर्चा व आपसी बहस होती दिख रही है।
कुल मिलाकर, अंकिता भंडारी केस में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के फैसले ने इस मामले को देवभूमि से निकालकर देश की राजधानी तक पहुंचा दिया है। एक तरफ सरकार का कहना है कि CBI जांच जारी है और न्याय होगा, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे बेटी के इंसाफ का सवाल बता कर सरकार को घेर रहा है। अंकिता के माता-पिता का धरना भले ही पुलिस कार्रवाई के बाद खत्म हो गया हो, लेकिन उनका 24 घंटे का अल्टीमेटम और भूख हड़ताल की चेतावनी सरकार पर दबाव बढ़ा रही है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या CBI जांच में VIP एंगल साफ होगा और क्या सरकार नियुक्ति पर पुनर्विचार करेगी। फिलहाल इस मुद्दे पर उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक सियासत लगातार गरमाई हुई है।