UNESCO रिपोर्ट: ग्रामीण भारत में 41% लड़कियां 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने में पीछे, शहरों में समानता

ग्रामीण भारत में उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के मामले में लड़कियां अब भी लड़कों से पीछे हैं। यूनेस्को की 2026 की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में हर 100 लड़कों के मुकाबले केवल 59 लड़कियां उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी कर पाती हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों में लड़के और लड़कियों के बीच इस मामले में समानता दर्ज की गई है।

Knews Desk– भारत में शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी लैंगिक असमानता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यूनेस्को की 2026 की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग (GEM) रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण भारत में लड़कों की तुलना में कम लड़कियां उच्च माध्यमिक स्तर तक की पढ़ाई पूरी कर पाती हैं। यह अंतर देश में शिक्षा के अवसरों और पढ़ाई पूरी करने की स्थिति के बीच मौजूद असमानता को सामने लाता है।रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत में उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने का लैंगिक समानता सूचकांक 0.59 है। इसका मतलब है कि इस स्तर पर लड़कियों की शिक्षा पूरी करने की स्थिति लड़कों की तुलना में काफी पीछे है। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में यह सूचकांक 1.00 दर्ज किया गया है, जो लड़के और लड़कियों के बीच समानता को दर्शाता है। पूरे देश के लिए यह आंकड़ा 0.89 है।

हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि लैंगिक समानता सूचकांक लड़के और लड़कियों की शिक्षा पूरी करने की स्थिति की तुलना करता है। इसे स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की दर नहीं माना जाना चाहिए। रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के लिए उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने की समानता हासिल करना अब भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है।दूसरी ओर, माध्यमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर पर आगे बढ़ने के मामले में लड़कियों की स्थिति बेहतर दिखाई देती है। शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में देश में माध्यमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर पर जाने की राष्ट्रीय दर 75.1 प्रतिशत रही। लड़कियों के लिए यह दर 77.9 प्रतिशत थी, जबकि लड़कों के लिए 72.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इस तरह इस चरण में लड़कियों की संक्रमण दर लड़कों से 5.5 प्रतिशत अंक अधिक रही।

राज्यों के आंकड़ों में भी अलग-अलग तस्वीर सामने आती है। कर्नाटक में माध्यमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर पर जाने की दर लड़कियों के लिए 70.3 प्रतिशत और लड़कों के लिए 54.9 प्रतिशत रही। उत्तर प्रदेश में लड़कियों की दर 80.2 प्रतिशत, जबकि लड़कों की 73.5 प्रतिशत दर्ज की गई। असम में लड़कों की संक्रमण दर 62 प्रतिशत और लड़कियों की 61 प्रतिशत रही। वहीं, मेघालय में लड़कियों की दर 48.3 प्रतिशत और लड़कों की 47.1 प्रतिशत थी।

वैश्विक स्तर पर भी उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने में लड़कियों और लड़कों के बीच अंतर दिखाई देता है। यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में 63 प्रतिशत लड़कियों और 60 प्रतिशत लड़कों ने उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। मध्य और दक्षिण एशिया में स्थिति अलग रही, जहां लड़कियों की पूर्णता दर 57 प्रतिशत और लड़कों की 60 प्रतिशत दर्ज की गई।नेपाल के आंकड़े भी इस अंतर को दर्शाते हैं। वर्ष 2024 तक वहां 89 प्रतिशत लड़के और लड़कियां निम्न-माध्यमिक शिक्षा पूरी कर रहे थे, लेकिन उच्च माध्यमिक स्तर पर लड़कियों की पूर्णता दर 44 प्रतिशत और लड़कों की 53 प्रतिशत रही। कंबोडिया और कोस्टा रिका में भी शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर लैंगिक अंतर कम होने के संकेत मिले हैं।यूनेस्को की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि माध्यमिक से आगे बढ़ने में लड़कियों की भागीदारी बेहतर होने के बावजूद ग्रामीण भारत में उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के मामले में समानता हासिल करना जरूरी है। शिक्षा के अवसरों तक पहुंच के साथ-साथ पढ़ाई पूरी करने की स्थिति में सुधार करना भी इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *