KNEWS DESK- महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान छात्रों को यातायात और बाहरी व्यवधानों से बचाने पर जोर, देरी से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को शर्तों के साथ प्रवेश देने का भी सुझाव।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार और उसे मजबूत बनाने को लेकर गठित संसदीय समिति ने महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के दिन रैली, जुलूस और जनसभाओं पर रोक लगाने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि परीक्षा के दौरान शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना, यातायात सुचारू रखना और कानून-व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम करना जरूरी है, ताकि परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो।
राज्यसभा सदस्य मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में ये सुझाव दिए। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में सुधार और उसे मजबूत बनाने से संबंधित है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के प्रश्नपत्र लीक होने के विवाद और NTA में कथित प्रशासनिक खामियों के बाद यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। इस विवाद के दौरान देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे।
PTI के मुताबिक, समिति ने सुझाव दिया है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन कर जिला प्रशासन को महत्वपूर्ण परीक्षाओं के दिन किसी भी रैली, जुलूस या अन्य जनसभा की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया जाए। समिति के अनुसार, ऐसे आयोजनों से परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र पहुंचने में देरी हो सकती है और वे निर्धारित समय पर प्रवेश पाने से चूक सकते हैं। इसलिए यातायात और कानून-व्यवस्था से जुड़े इंतजाम पहले से किए जाने चाहिए।
समिति ने परीक्षा केंद्रों पर कुछ मिनट की देरी से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने की प्रक्रिया पर भी चिंता जताई। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बार वास्तविक कारणों से देरी होने के बावजूद छात्रों को परीक्षा में बैठने का मौका नहीं मिलता, जिससे उनकी पूरे साल की मेहनत बेकार हो सकती है। समिति ने ऐसी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है, जिसके तहत देर से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों से देरी का कारण दर्ज करने वाला लिखित वचनपत्र लेकर उन्हें परीक्षा कक्ष में प्रवेश दिया जा सके। हालांकि, ऐसे अभ्यर्थियों को केवल शेष समय में ही परीक्षा देने की अनुमति मिले और किसी भी स्थिति में अतिरिक्त समय न दिया जाए।
रिपोर्ट में परीक्षा के दौरान होने वाली औपचारिकताओं को लेकर भी सुझाव दिया गया है। समिति का मानना है कि निरीक्षकों द्वारा हस्ताक्षर कराने और जांच संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करने से समय के दबाव में परीक्षा दे रहे छात्रों का ध्यान भटक सकता है। इसलिए इन औपचारिकताओं के लिए परीक्षा शुरू होने से पहले या समाप्त होने के बाद 15 मिनट का अलग समय निर्धारित करने की सिफारिश की गई है। समिति के अनुसार, परीक्षा की निर्धारित अवधि के बीच ऐसी प्रक्रियाएं नहीं की जानी चाहिए।समिति के इन सुझावों का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों को होने वाली परेशानियों को कम करना और परीक्षा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है।