KNEWS DESK- पितृपक्ष में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनका निधन एकादशी तिथि को हुआ हो। जानें 6 अक्टूबर 2026 को एकादशी श्राद्ध के शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम।
पितृपक्ष के 16 दिनों में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने की परंपरा है। हिंदू धर्म में आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी श्राद्ध कहा जाता है। साल 2026 में एकादशी श्राद्ध 6 अक्टूबर, मंगलवार को किया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन पितरों का निधन एकादशी तिथि को हुआ था, उनके लिए इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना विशेष माना जाता है।
ऐसे में अगर परिवार में किसी पूर्वज की मृत्यु शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को हुई थी, तो पितृपक्ष की एकादशी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जा सकता है। श्राद्ध कर्म में मृत्यु की तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है और इसी के आधार पर पितरों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है।
एकादशी श्राद्ध किन पितरों के लिए किया जाता है?
एकादशी श्राद्ध मुख्य रूप से उन पूर्वजों के लिए किया जाता है, जिनका निधन एकादशी तिथि को हुआ हो। इसमें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष, दोनों की एकादशी तिथियां शामिल होती हैं। अगर परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु किसी महीने की शुक्ल एकादशी या कृष्ण एकादशी को हुई थी, तो पितृपक्ष में आने वाली एकादशी तिथि पर उनके लिए श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।
मृत्यु तिथि पता न हो तो क्या करें?
कई बार परिवारों को अपने पूर्वज की मृत्यु की सही तिथि या पक्ष की जानकारी नहीं होती है। ऐसी स्थिति में धार्मिक परंपरा के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन ऐसे पितरों के लिए सामूहिक श्राद्ध करने का विधान माना जाता है। इसलिए अगर किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, तो केवल एकादशी श्राद्ध के दिन ही उनका श्राद्ध करना जरूरी नहीं माना जाता। ऐसे पितरों के लिए सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।
एकादशी श्राद्ध 2026 का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को एकादशी श्राद्ध के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं।
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक। इसकी अवधि 47 मिनट है।
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 बजे से 1:20 बजे तक। इसकी अवधि 47 मिनट है।
अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से 3:40 बजे तक। इसकी अवधि 2 घंटे 21 मिनट है।
पंचांग परंपरा में पितृपक्ष के पार्वण श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त के साथ अपराह्न काल को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्राद्ध कर्म के अंत में तर्पण करने की परंपरा है।
एकादशी श्राद्ध में क्या-क्या किया जाता है?
एकादशी श्राद्ध के दौरान सबसे पहले पितरों का स्मरण करके संकल्प लिया जाता है। इसके बाद परिवार की परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन जैसे कर्म किए जाते हैं।
तर्पण के दौरान पितरों का नाम और गोत्र लेकर उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद पिंडदान और भोजन आदि कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद पितरों का स्मरण करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की भावना से प्रार्थना की जाती है। पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म करते समय परिवार की कुल परंपरा और मान्यताओं का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।