पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की कवायद तेज हो गई है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शुक्रवार को राहुल गांधी से मुलाकात कर पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया।
Knews Desk – पंजाब में कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस संगठन में बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रही है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा औपचारिक रूप से सौंप दिया। वड़िंग अप्रैल 2022 में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे और करीब साढ़े चार साल तक इस पद पर रहे।
राहुल गांधी से मुलाकात के बाद वड़िंग ने कहा कि राहुल गांधी ने उनसे पंजाब के हालात, वहां क्या हो रहा है और आगे पार्टी को क्या करना चाहिए, इस बारे में जानकारी ली। उन्होंने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल के अनुभव, पार्टी की चुनौतियों और उसकी ताकत को लेकर राहुल गांधी के साथ विस्तार से चर्चा की।
वड़िंग ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें हमेशा की तरह काफी प्यार दिया। उन्होंने राहुल गांधी को पंजाब कांग्रेस का नेतृत्व करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि पार्टी को जब भी उनकी जरूरत होगी, वह सेवा के लिए मौजूद रहेंगे।
वड़िंग का इस्तीफा पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच आया है। पार्टी ने हाल ही में पंजाब के लिए अपने AICC प्रभारी भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को जिम्मेदारी दी थी। इसके बाद पंजाब कांग्रेस के संगठन और नेतृत्व को लेकर बदलाव की चर्चा तेज हुई।
वड़िंग ने अपने इस्तीफे के बाद सचिन पायलट की भूमिका को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ठोस सबूत नहीं है, लेकिन उन्हें लगता है कि शायद पायलट ने तय किया हो कि अब उन्हें पद से हटाने का समय आ गया है। यह वड़िंग का अपना आकलन था, जिसकी उन्होंने पुष्टि नहीं होने की बात भी कही।
पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला, परगट सिंह, राणा केपी सिंह, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में विजय इंदर सिंगला को प्रमुख दावेदार बताया गया है, हालांकि आधिकारिक नियुक्ति की घोषणा अभी बाकी है।
पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस के प्रदेश संगठन में यह बदलाव चुनाव से पहले पार्टी की अगली रणनीति और नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।