KNEWS DESK- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गुजरात में UCC लागू करने की संवैधानिक प्रक्रिया का अहम चरण पूरा हो गया है। गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में विधेयक पारित किया था।
गुजरात, उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता पारित करने वाला दूसरा राज्य बन गया है। हालांकि, कानून के प्रावधान अनुसूचित जनजाति (ST) और संविधान के तहत संरक्षित कुछ समूहों पर लागू नहीं होंगे। कानून में विवाह और तलाक के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। नियमों का पालन नहीं करने पर ₹10,000 तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही लिव-इन संबंधों का पंजीकरण और उनके समाप्त होने की सूचना देना भी जरूरी होगा।
लिव-इन संबंध से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार मिलेंगे और महिला के पार्टनर द्वारा उसे छोड़ने की स्थिति में गुजारा भत्ता पाने का प्रावधान है। कानून में एक से अधिक विवाह पर रोक लगाई गई है और इसका उल्लंघन करने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान है। जबरन विवाह और अदालत के आदेश के बिना तलाक जैसी स्थितियों के लिए भी दंड का प्रावधान किया गया है। तलाक के बाद दोबारा विवाह पर किसी अतिरिक्त शर्त को नहीं रखा गया है।